मोर छत्तीसगढ़ महतारी

1. जिंहा खिले-फुले धान, सुग्घर खेत अउ खलिहान। देवी-देवता के हे तीर्थ धाम, कहिथे ग इंहा के किसान। मोर छत्तीसगढ़ महतारी, हे ग महान…….! 2. दुख पीरा के हमर दुर करइया, हरय हमर छत्तीसगढ़ मइया। हरियर-हरियर हे दाई के अंगना, कहिथे ग इंहा के लइका अउ सियान। मोर छत्तीसगढ़ महतारी, हे ग महान…..! 3. माटी ल मांथा म लगाके देखबे, चन्दन – बंदन ल भुला जाबे। गुलाब कस सुंगंध दिही, कहिथे ग इंहा के मजदूरमन। मोर छत्तीसगढ़ महतारी, हे ग महान……! 4. सुत उठ के करथंव प्रणाम, इही मोर दाई-ददा…

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छेरछेरा

सबो संगवारी मिलके, झोला धरके जाथे। सब के मुहाटी मा, जा जा के चिल्लाथे।। छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ल हेरहेरा। अरन बरन कोदो दरन, जभे देबे तभे टरन।। कोनो देथे रूपया पइसा, कोनों धान ल देथे। धान मन ला बेंच के, पइसा ल बांट लेथे।। पुन्नी के मेला जी, इही दिन होथे। पइसा ल धरथे अऊ, मेला घूमे ल जाथे।। सबो संगवारी मन, मेला म मिलथे। हांस हांस के सबो झन, झूला ल झूलथे।। घूम घूम के अब्बड़, चाट गुपचुप खाथे । पेठा अऊ रखिया पाख धरके, घर…

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