कविता – चिड़िया रानी

चिड़िया रानी बड़ी सयानी , दिनभर पीती पानी। दाना लाती अपना खाती, बच्चों को संग खिलाती । चिड़िया रानी चिड़िया रानी —-।। सुबह सुबह से , चींव चींव करके। सबको सपनों से जगाती, चिड़िया रानी चिड़िया रानी ।। आसमान की सैर करती, बाग बगीचों में घूमा करती। रंग बिरंगी फूल देखकर , मीठी मीठी गीत सुनाती । चिड़िया रानी चिड़िया रानी ।। बच्चों को उड़ना सिखाती, घर घर के आंगन को जाती। चींव चींव कर सबको बुलाती, चिड़िया रानी चिड़िया रानी ।। दाना लाती पत्ते लाती, तिनका तिनका करके। पेड़ों…

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यमराज ला होगे मुस्किल

भगवान भोलेनाथ कर विष्णु जी हा एक दिन पहुँचिस अउ महादेव ला कहिस-हे त्रयम्बकेश्वर! एक विनती करेबर आय हँव।महादेव कहिस- काय बात आय चक्रधर! आज आप बहुतेच अनमनहा दिखत हव।अइसे कोन बूता आय जौन ला आप नइ कर सकव।विष्णु जी कहिस- का बताँव महराज! ये यमराज हा उतलंग नापत हे। जतका हमर भगत हे, सब ला रपोट बहार के उपर लावत जात हे। नियम कानून के पालन नइ करत हे। हमन नियम बनाय रहेन कि जौन मन देबी देवता के भगत हवे ओमन ला यमराज हा हाथ झन लगाही।फेर वो…

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