51 शक्तिपीठ म सबले बडे़ ज्वाला जी

Jwala Deviये पवित्र स्थान के मान्यता 51 पीठ म सबले जादा हवय। लोगन के मान्यता के अनुसार भगवती सती के जीभ ल श्री हरि हर अपन चक्र से काट के धौलगिरि पहाड़ म गिरइस हवय अउ महादेव हर खुद भैरव बाबा के रूप म एमेर विराजमान हवय। देवी के दर्शन करे बर करोड़ो श्रद्वालु मनखे इहाॅं पहुचथें। इहाॅं नौ जगहा म दिव्य योति बिना ईंधन के स्वयं जलत रहिथे जेखर कारण से देवी ल वाला जी कहिके पुकारे जाथे।
श्री ज्वाला जी मंदिर के निर्माण के विषय म एक ठन दंत कथा हवय। दंत कथा के अनुसार सतयुग म सम्राट भूमिचंद हर अनुमान करिस कि जेन समय सती के मृत शरीर ले लेके तीनों लोक म fकंजरत रहिस हवय ओही समय भगवान विष्णु हर ओला माया के वशीभूत जानके अपन सुदर्शन चक्र ले सती-काया के खण्ड-खण्ड कर दीस अउ सती के जीभ हर कटा के हिमालय के धौलादार पहाड़ म गिरिस, राजा भूमिचंद हर वो जगहा ल खोजे के बहुत प्रयास करिस फेर वोला नई पइस तव राजा हर भगवती सती के एक ठन छोटे से मंदिर बनवइस जेमा रोज श्रद्वालु मन हर पूजा-पाठ करे लागिन। कुछ समय गुजरे के बाद एक दिन एक झन ग्वाला हर राजा ल आके सूचना दीस कि पहाड़ म मैं हर ज्वाला निकलत देखे हववं जेन हर लगातार बरत हवय। ग्वाला के गोठ ल सुनके राजा भूमिचंद हर बड़ खुश होइस अउ ओ जगहा म जाके दिव्य ज्वाला के दर्शन करिस अउ ओही मेर भव्य मंदिर के निर्माण करवइस अउ देवी के पूजा-अर्चना बर शाक द्वीप के भोजक जाति के दू ब्राह्मण पूजन आदि के अधिकार प्रदान करिस हवय। वो ब्राह्मण मन के नाव श्रीधर अउ कमलापति रहिस। वो ब्राह्मण मन के वंशज मन आज तक माता वाला के दरबार के पूजा करत आवत हवय।
श्री ज्वाला जी मंदिर म देवी माॅं के दर्शन नौ योति के रूप म होथे। ये योति मन कभु कम अउ कभु जादा होवत रहिथें। इही मन हर संपूर्ण ब्रह्मांड के रचना करइया शक्ति माने जाथे जेखर सेवा सत्व, रज अउ तमो गुण हर करथे।
मंदिर के द्वार से प्रवेश करत समय चाॅंदी के आला म मुख्य योति बरत हवय जेन ला महाकाली के रूप अउ सांसारिक प्राणी मन ल भक्ति अउ मुक्ति देवइया माने जाथे। अन्य पवित्र योति मन के दर्शन करे से दुख-दरिद्र अउ पाप के नाश होथे। महाकाली योति के तरी म अन्न धन के भंडार भरइया माता अन्नपूर्णा के पवित्र योति हवय। ओखर दूसर तरफ तीसरा योति चंडी माता के हवय जेन हर शत्रु के विनाश करइया आय। समस्त रोग के विनाश करइया चौथा योति fहंगलाज भवानी के हवय। पाॅंचवा योति सुख संपत्ति अउ वैभव देवइया महालक्ष्मी के हवय। छठवा याति fवंध्यवासिनी के हवय जेन हर शोक से छुटकारा दे के अभय प्रदान करथे। सातवा याति विद्यादायिनी वीणावादिनी माता सरस्वती के हवय। आठवा योति के रूप म सुख देवइया देवी अंबिका हवय जेन हर पूर्ण श्रद्वा से उपासना करइया सुहागिन मन ला संतान प्रदान करथे। नौवा योति देवी अंजना के हवय जेन हर अल्पायु प्राणी मन ल दीर्घायु प्रदान करथे। अइसन माता ज्वाला देवी के दर्शन करे ले मनखे के जीवन धन्य हो जथे।

संकलन अउ अनुवाद
मनोज कुमार श्रीवास्तव
शंकर नगर नवागढ़,
जिला- बेमेतरा, छ.ग. पिन- 491337
मो. 8878922092
(सौ. सनस्टार समाचार पत्र)

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  • शकुन्तला शर्मा

    ” या देवि सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता:।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥”

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