कविता : नवां अंजोर अउ जाड़

नवा अंजोर आही
एकर अगोरा हे,
मोर छत्तीसगढ़ धान के
कटोरा हे।

जुन्ना गइस सरकार,
राज सुघ्घर चलाइस हे,
नवा सरकार ह उजयारी
के सपना देखाइस हे।

अब सपना के पूरा होवत ले अगोरबो
परजा तन्त्र निक हे सबला परखबो।

तुंहर भी जय हो हमरो घलो जय हो
लोगन के सेवा आगु जम्मो के विजय हो।

जाड़

अबड़ लागत हे जाड़ संगी
हाड़ा कपकपात हे।
आँखि नाक दुनो कोती ले
पानी ह बोहात हे।।
अंगेठा सिरा गे भुर्री बुझागे
रजाई के भीतरी खुसर के
नींद ह भगागे।।
संम्पन्नता के स्वेटर ह
गोदरी ल् बिजरात हे
गरीब मर के सड़क म
इंसानियत शरमात हे
कोनो के थाली म सीथा नई हे
कोनो महफ़िल म वो फेकात हे
कोनो जगह पानी नई हे
कोनो जगह मदिरा बोहात हे
तिल तिल के मरत इंसानियत ह
त कोनो रास रंग मनात हे

अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा

संघरा-मिंझरा

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