महू तोर संगी : बालमुकुंद शर्मा ‘गूंज’ के गीत





बाबू के ददा काबर अंटियावथस
बाबू के ददा तैं कार अंटियावथस
तोरेच बनाय नइ बने हे कुरिया …… तयं कार अंटियाथस

महू पलोय हौं पानी अउ माटी
महू ह जांगर ल टोरेवं साथी ….. तयं कार अंटियाथस
बाबू के दादा काबर….

कुकरा के बोली मं जठना घरियायेवं
ठुठरत पहरिया मं तरिया नहायेवं
गुंगुवावत आगी मं जेवना चढायेवं
पताल कुंआ ले हीचेवं पानी रे साथी
टठिया मं जेवना, संग धरेवं रे साथी ….. तयं कार अंटियाथस

खन्ती ल कोड़ेस, त मेढ़वा चढा़येवं
नागर चलायेस त नींदे में आयेवं
गुरुआ बर कांदी, मुड़ी उठायेवं
मेटे ल थकासी ददरिया रे गायेंव
रतिया बर रघनी मं निगेवं रे साथी ….. तयं कार अंटियाथस

उठत मयरुवा ल सोखना सोखाएं
छांती के मया ल छांतीच मं मारेवं
अफीम के घुट्टी मं उलूल डारेवं
रोवत मयारु बर छतिया तरसगे
कोरा के जठना, सपना होगे साथी ….. तयं कार अंटियाथस

दाई अऊ ददा के मया बिसरायेवं
बारा बच्छर के तोर घर आयेवं
बाहर अऊं भीतर मं फुगड़ी कस नाचेवं
तोरेच जिंदगानी सवारेवं रे सांथी
तभोले मुंह तोर टेडगाच हे सांथी ….. तयं कार अंटियाथस
बाबू के दादा काबर अंटियाथस

बालमुकुंद शर्मा ‘गूंज’
मालवीय नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ)







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