बेटी के हाथ मा तलवार करव बिचार

ओ दिन छग ले परकासित सबो अखबार मा फोटू छपे रहिस, संगे संग लिखाय रहिस -“बेटियों ने थामी तलवार” । पढ़के मोर आत्मा कलप गे। जौन बेटी ल ओकर दाई ह चूल्हा फूकेबर, बर्तन मांजे बर,घर लिपेबर, साग भात रांधेबर, पढ़लिख के अपन गोड़ मा खड़े होयबर अउ ममता, मया के संग जिनगी बिताय के गुन सीखे के सिच्छा देथय।आज समाज मा हमर बेटी के हाथ मा तलवार धरात हे।हमर बेटी मन घलो,चाहे पढ़े लिखे होय चाहे अनपढ़, परबुधनीन बनत जात हे।गुनीक मन बिचार करव।का ये बने होवत हे?कुछेक बच्छर पहिली अइसने बेटा मन ल तियार करे रहिस।जेकर बिकराल रुप अब रैली,हड़ताल, नगर बंद, चक्का जाम मा देखेबर मिलथे।

देस भर मा,नारी ससक्तिकरन चलत हे। बेटी मन बर बने बात आय। फेर एकर उद्देस अलग हे।बेटी,बहिनी, महतारी मन पढ़लिख के अपन गोड़ मा खड़े हो जाय।दू पइसा कमाय, ककरो मुहँ ल झिन ताकय।फेर तलवार लहराय अउ सक्ति परदसन काकर बर? सबला बिचारे के बात आय, कि दाई ददा मन तो नी सिखात हे? तब हमर बेटी के हाथ मा लउठी, डंडा के पाछू अब तलवार कोन धरात हे? आत्मरक्षा बने बात आय फेर तलवार धर के ? कोनो दूसर तरीका घलो हो सकत हे। ये कइसन संस्कृति अउ संस्कार हमर बेटी मन ल सिखावत हन।एक डाहर बेटा बेटी एक बरोबर के नारा लगात सब जगा मान देवत हन।इही बेटी मन देस के नांव उँच करत हे।देसबर मेडल लानत हे।चंदा अउ मंगल मा जावत हे।तब अइसन का जरुरत पड़गे कि अब तलवार धरा के आगू मा लानत हन।
हमन सुने हन अउ इतिहास मा पढ़े हन, अंग्रेज मनके बिरोध मा लक्ष्मी बाई, दुर्गावती सही कतको बेटी मन तलवार धरे रहिन हे।फेर अब देस अजाद होगे हे, संविधान अउ कानून बेवस्था हे।तभो ले हमर बेटी मन ल तलवार धरात हे।
छत्तीसगढ़ मर्यादा पुरुषोत्तम राम के महतारी के भुइयाँ आय।राम ल 14 बच्छर के बनवास होइस तब कौशिल्या तलवार उठाइस?
नारी परानी अउ बेटी मा सहनशीलता, धीरज, दया, करुना होय कहिके सब चाहथन। बेटी एक नहीं दू कुल के तारने वाली हरे कहिथन। तब अब के बेटी मन तलवार धरके तारही?
हमर छत्तीसगढ़ के पावन भुँइया मा देवी मन के पूजा अबड़ेच जगा होथे।बम्लेश्वरी, दंतेश्वरी, महामाया, गंगामैया, चंन्द्रहासिनी, सियादाई, जतमाई, घटारानी, रानीमाई, अंगार मोती, शबरी ……। सबो देवी मन के अलग अलग कथा कहिनी अउ महिमा हे। अइसने बहादुर कलारिन, तेलिन सत्ती, राजिम माता, राजमोहिनी देवी, मिनीमाता…… हमर छग के बेटी महतारी आय।ये मन समाज ल नवा रद्दा बतायबर बेटा मन के संग मा मिलके बुता करिन।
गांव गांव मा नारी सक्ति संगठन बने हे। गांव मा गुडागिरी, मवालीगिरी, नसाखोरी, जुआ, सट्टा के बिरोध मा बने बुता करत हे।बनेच अकन गांव मा इंकरे सेती सान्ति आ गे हवय।ये सब बुता गांव के सुम्मत अउ शांति के संग होवत हे।फेर अब कोन जनी काकर आँखी फूटत हे।बेटी मन के हाथ मा तलवार धराके काकर भला होने वाला हे?परदा के पाछू कोन खड़े हे?ओकर मन मा का चलत हे? जौन ह कुँवारी बेटी मन ल तलवार धराके खड़े करत हे। हमन जानत हन जब बेटी मन बने बने हे तब लछमी,सरसती,अनपूरना हे, अउ बिगड़गे त काली, चंडी, के रुप धर लेथे। बेटी के हाथ मा तलवार रही तब मइके मा दाई ददा सकपकाय रही अउ ससुरार मा ……….।

हीरालाल गुरुजी “समय”
छुरा,जिला- गरियाबंद

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