बेटी के महिमा

बेटी होथे राज दुलारी, लक्ष्मी जइसे येला मान ।
यहू हरे घर के दीपक जी, बढ़हाथे गा घर के शान।।

सबले पहिली बिहना उठथे, घर के करथे बूता काम ।
कभू नहीं आराम करे जी, नइ माँगे वो काँही दाम ।।

काम धाम मा हाथ बँटाथे , दाई ला देवय वो साथ ।
सबके सेवा करधे बेटी, रहय नही गा रीता हाथ ।।

करे शिकायत कभू नहीं वो , खावय सबझन मिलके बाँट ।
भात साग ला बढ़िया राँधय , खुश होके सब खावय चाँट ।।

कम झन आँकव बेटी संगी, उड़ा लेत अब जेट विमान ।
सैनिक बन के रक्षा करथे, हमर देश के येहर शान ।।

सिधवा बर जी सिधवा हावय, बैरी बर बन जाथे काल ।
मुड़ी काट के हाथ म देवय , नइ चलन देय ओकर चाल ।।

थरथर काँपय बैरी मन हा , लेथे जब चंडी अवतार ।
जान बचा के बैरी भागे , छोड़ अपन सब्बो हथियार ।।

महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया (कबीरधाम)
छत्तीसगढ़
8602407353
mahendradewanganmati@gmail.com

संघरा-मिंझरा

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