देव म महादेव भकूर्रा महादेव

हमर छत्तीसगढ़ राज म सिव परम्परा हर अब्बड़ पुराना हवय।इंहा के कलचुरी राजा मन हर बड़का -बड़का सिव मंदिर के निरमान ल करवाइन, त ले जेमा कछु सिव मंदिर हर स्वयंभू हरे। जेमा सबले अदभुत अउ पुराना स्वयंभू भूतेश्वर नाथ ‘भकूर्रा महादेव’ हवय।
छत्तीसगढ़ राज म जिला गरियाबंद म बिराजे भूतेश्वर नाथ ‘भकूर्रा महादेव’ हर गरियाबंद ले 3 कि। मी। दूरिया म नानकुन गांव मरौदा म बिराजे हवय। इंहा के सिव लिंग हर अब्बड़ बिसाल हवय। अब्बड़ बड़का पहार म सिव लिंग के छबि हर विराज मान हवय। इही सिवलिंग ल विस्व के परसिद्ध बिसाल सिव लिंग के उपाधि घलो मिले हवय।
गीता प्रेस गोरख पुर ले प्रकासित कल्यान के पतरिका सन् 1950-51 के अंक म एेखरे उल्लेख हर मिले हवय। इंहा के सिव लिंग के ऊंचाई हर 70 फीट हवय,अउ मोटाई हर 220 फीट हवय। जेखर सेती येला विस्व के सबले बड़का महादेव के रूप म पूजे जाथे।
इंहा के लोगन मन के कहना हवय के इही सिव लिंग हर दिनों दिन बाढ़त हवय।
पंचवटी के बीच म विराजे भूतेश्वर नाथ के जल हरि देवी के संग म बिराजै हे। टूटहा -फूटहा अवसेस के रूप म नांदी विराजै हवय। फेर कछु बछर ले इंहा के भक्त मन सिव लिंग के आगू म एकठन बड़का नांदी भगवान के मूरती ल स्थापित कर देहे। मंदिर म एक ठन बिसाल तोरन दुवार के स्थापना होगे हे। संगे संग दुर्गा दाई मंदिर, राम जानकी मंदिर, राधा किसन मंदिर, गनेस मंदिर, हनुमान मंदिर अउ सिरी सियासरन भुनेश्वरी महाराज के मंदिर के निरमान भक्त मन कर डारे हे।
भकूर्रा महादेव के महिमा के सिरतोन परमान हवय। बछर सन् 1950-60 के दसक म इंही ठउर म सिदध साधु बबा मन, महात्मा मन तपस्या करत रिहिन। इही ठउर म गोल्लर के हुंकारू हर रोजे गुंजत रिहिस। गोल्लर के हुंकारू ल एकझिन गइया चरइया हर सुनिस त गांव म जाके सब्बो झन ल गोल्लर के हुंकारू के गोठ ल सुनाइस।सिरतोन गोल्लर के हुंकारू ल सुन के सब्बो झिन चोरो अंग किंदर के देखे लगिन, फेर कोनो ल वोमेर नइ देखिन। त उही दिन ले इंहा के लोगन मन हर भकूर्रा महादेव कहे लगिन।




आज ले पच्चीस-तीस बछर पहिली इंहा संत सिरी सिया भुवनेश्वरी शरन व्यास सिर कटटी वाला हर अपन साधना अउ उपासना करे रिहिस। अउ ओला सिरतोन साक्छात सिव के दरसन मिले रिहिस। उंही बखत ले इंहा संत सिया भुनेशवरी शरन व्यास महाराज के सानिध्य म सिवरातरी म तीन दिन के मंड़ई भरे रिहिस अउ तीन दिन ले हुमन होय रिहिस। उही बखत ले आजो तको हर बछर इंहा सिवरातरी म मड़ई मेला हर भराथे।
महासिवरातरी हर हमर हिन्दु मन के बड़का तिहार हवय। इही तिहार हर भगवान संकर के तिहार हरे। महासिवरातरी के दिन त हमर छत्तीसगढ़ राज म महादेव सिव लिंग के पूजा-पाठ अउ अराधना के अब्बड़ महत्व हवय।
महासिवरातरी हर फागुन कृस्न पछ के चतुर्दसी के दिन होथे। इही दिन भगवान संकर के ब्रह्म ले रूद्र रूप म अवतार होय रिहिस। प्रलय के समे इही प्रदोस काल म भगवान सिव हर तांडव करे रिहिस। इही दिन म भगवान के तिसरा आंखी खुले रिहिस। ऐखरे सेती ऐला महा सिवरातरी अउ कालरातरी कहे जथे।अइसना कहे जथे के इही दिन भगवान संकर के बिहाव पारवती के संग होय रिहिस। हर बछर बारा ठन सिवरातरी होथे तेमा महासिवरातरी के अब्बड़ महतम हवय।
सिवरातरी के इही महतम के सेती इही भकूर्रा महादेव म सिवरातरी के दिन दूरिया -दूरिया ले सिव भक्त मन अउ दरसन करइया मन के इंहा तांता लगे रहिथे। इंहा अा के लोगन मन ल हिदय म सान्ति अउ साक्छात सिव भगवान के दरसन होथे। अउ सुघ्घर प्रकृति के दरसन होथे। इही पाय के सब्बो मनखे मन के मन ल इह चमत्कारिक सिवलिंग हर मोहत हे अउ आज भकूर्रा महादेव हर विस्व म परसिदध होगे हवय।

डॉ. जयभारती चंद्राकर
प्राचार्य
सिविल लाईन गरियाबंद,
जिला गरियाबंद छ। ग।
मोबाइल न। 9424234098

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