गरमी के भाजी

गुरतुर हे इहां के भाजी ह , बड़ सुघ्घर हे लागय।
अम्मट लागथे अमारी हा, सोनू खा के भागय।।

किसम किसम के भाजी पाला , हमर देश मा आथे।
सोनू मोनू दूनो भाई , खोज खोज के लाथे।।

लाल लाल हे सुघ्घर भाजी , अब्बड़ खून बढाथे ।
चैतू समारु खाथे रोजे , सेहत अपन बनाथे ।।

बड़ उलहाये हवय खेत मा , चना लाखड़ी भाजी ।
गुरतुर लागय दूनो हा जी , रांधे सुघ्घर भौजी।।

आये हवय बोहार भाजी , गली गली चिल्लाये।
अमली डार दाई ह रांधे , घर गोहार लगाये।।

लंबा लंबा चेंच भाजी ल , बरी डार के रांधय।
सोनू मोनू दूनो झन हा, जूरी ला हे बांधय।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
Priyadewangan1997@gmail.com



संघरा-मिंझरा

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