मजदूर

जांगर टोर मेहनत करथे, माथ पसीना ओगराथे । मेहनत ले जे डरे नहीं, उही मजदूर कहाथे । बड़े बिहनिया सुत उठके, बासी धर के जाथे । दिन भर बुता काम करके, संझा बेरा घर आथे । बड़े बड़े वो महल अटारी, दूसर बर बनाथे । खुद के घर टूटे फूटे हे , झोपड़ी मा समय बिताथे । रात दिन जब एक करथे, तब रोजी वो पाथे । मेहनत ले जा डरे नहीं, उही मजदूर कहाथे । पानी बरसा घाम पियास, बारो महीना कमाथे । धरती दाई के सेवा करके, सुघ्घर…

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पुतरी पुतरा के बिहाव

पुतरी पुतरा के बिहाव होवत हे, आशीष दे बर आहू जी। भेजत हाँवव नेवता सब ला, लाड़ू खा के जाहू जी।। छाये हावय मड़वा डारा, बाजा अब्बड़ बाजत हे। छोटे बड़े सबो लइका मन, कूद कूद के नाचत हे।। तँहू मन हा आके सुघ्घर, भड़ौनी गीत ल गाहू जी। भेजत हावँव नेवता सब ला, लाड़ू खा के जाहू जी।। तेल हरदी हा चढ़त हावय, मँऊर घलो सौंपावत हे। बरा सोंहारी पपची लाड़ू, सेव बूंदी बनावत हे।। बइठे हावय पंगत में सब, माई पिल्ला सब आहू जी। भेजत हावँव नेवता सब…

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