फाग गीत – होली हे

उड़त हे अबीर गुलाल, माते हे मऊहा चार I टेसू फुले, परसा डोले, पींयर पींयर सरसों रस घोरे, दुल्हन कस धरती के सिंगारI उड़त हे अबीर गुलाल, होली हे ——– मऊरे आमा मद महकाएँ, कोयलियाँ राग बासंती गायें I कनवा, खोरवा गंज ईतरायें, नशा के मारत हे उबाल, उड़त हे अबीर गुलाल I होली हे ——— ढोल,मजीरा, मृदंग बाजै, घुँघरू के सन गोरी नाचै I होठ रसीले गाल गुलाबी, फागुन के येदे चाल शराबी I माते हे मऊहाँ अऊ चार, उड़त हे अबीर गुलाल I होली हे ——– नींद निरमोही…

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छत्तीसगढ़ी बाल गीत

कुतर-कुतर के खाथस मुसवा, काबर ऊधम मचाथस मुसवा। चीं-चीं, चूँ-चूँ गाथस काबर तैं, बिलई ले घबराथस काबर तैं । काबर करथस तैं हर कबाड़ा, अब तो नइ बाँचे तोरो हाड़ा। बिला मा रहिथस तैं छिप के, हिम्मत हे तब देख निकल के। कान पकड़ के नचाहूँ तोला, अड़बड़ सबक सिखाहूँ तोला। बलदाऊ राम साहू

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