ठगही फेर सकरायेत

कहे क्रांति कबिराय, नकल ले झन धोका खाना कोलिहा मन ह ओढ़े हावंय, छत्तीसगढ़िया बाना। मीठ-मीठ गोठिया के भाई, मूरुख हमला बनाथे बासी चटनी हमला देथे, अउ काजू अपन उड़ाथे। बाहिर म बन शेरखान, बिकट बड़ाई अपन बतावै भीतर जाके चांटे तलुआ, नांउ जइसे तेल लगावै। आरएसएस ल कहत रहिस वो, अपन गोसंइया बदलिस कुरसी बदल गइस, ओकर दादा-भईया। चतुर बहुत चालक हे, वो सकरायेत ये मोर भाई छत्तीसगढ़िया भेख बनाके, ठगथे हमर कमाई। सकरायेत के गाड़ा-गाड़ा बधाई के संग – तमंचा रैपुरी

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युवा दिवस 12जनवरी बिसेस

“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” “उठव, जागव अउ लक्ष्य पाय के पहिली झन रुकव” भारत भुँइया के महान गौरव स्वामी विवेकानंद के आज जनम दिन हरय। स्वामी जी के जनम 12 जनवरी सन् 1863 के कलकत्ता (अब कोलकाता) म होय रिहिस। ऊँखर पिताजी के नाँव बाबु विश्वनाथ दत्त अउ महतारी के नाँव सिरीमती भुवनेश्वरी देवी रिहिस। ऊँखर माता-पितामन ऊँखर नाँव नरेन्द्रनाथ रखे रिहिन। बचपन ले ही नरेन्द्रनाथ धार्मिक सुभाव के रिहिन। धियान लगाके बइठे के संस्कार उनला अपन माताजी ले मिले रिहिस। एक बार नरेंद्र एक ठी खोली म अपन संगवारी…

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