छत्‍तीसगढ़ी गद्य में छंद प्रयोग

दोहा गजल (पर्यावरण)

रुख राई झन काटहू, रुख धरती सिंगार। पर हितवा ये दानियाँ, देथें खुशी अपार।~1 हरहिंछा हरियर *अमित*, हिरदे होय हुलास। बिन हरियाली फोकला, धरती बंद बजार।~2 रुखुवा फुरहुर जुड़ हवा, तन मन भरय उजास। फुलुवा फर हर बीज हा, सेहत भरे हजार।~3 डारा पाना पेंड़ के, करथें जीव निवास। कखरो कुरिया खोंधरा, झन तैं कभू उजार।~4 धरती सेवा ले *अमित*, […]

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राखी

छन्न पकैया छन्न पकैया,पक्का हम अपनाबो। नइ लेवन अब चीनी राखी,देशी राखी लाबो।1 छन्न पकैया छन्न पकैया,बहिनी आँसों आबे। हमर देश के रेशम डोरी,सुग्घर तैं पहिराबे।2 छन्न पकैया छन्न पकैया, सावन आय महीना। हमर देश के राखी ले के,पहिरव ताने सीना। छन्न पकैया छन्न पकैया,चलन विदेशी छोड़ी। किसन सुभद्रा जइसे भैया,राहय सब के जोड़ी। छन्न पकैया छन्न पकैया,राखी कीमत जानौ। […]

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