किरीट सवैया : पीतर

काखर पेट भरे नइ जानँव पीतर भात बने घर हावय। पास परोस सगा अउ सोदर ऊसर पूसर के बड़ खावय। खूब बने ग बरा भजिया सँग खीर पुड़ी बड़ गा मन भावय। खेवन खेवन जेवन झेलय लोग सबे झन आवय जावय। आय हवे घर मा पुरखा मन आदर खूब ग होवन लागय। भूत घलो पुरखा मनखे बड़ आदर देख ग

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किरीट सवैया : कपूत नहीं सपूत बनो

देखव ए जुग के लइका मन हावय अब्बड़ हे बदमास ग। बात कहाँ सुनथे कखरो बस दाँत निपोरय ओ मन हाँस ग। मान करे कखरो नइ जानय होवत हे मति हा अब नास ग। संगत साथ घलो बिगड़े बड़ दाइ ददा रख पाय न आस ग। पूत सपूत कहूँ मिल जातिस नैन नसीब म काबर रोतिस। राम सहीं लइका हर

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