मानसून मा : कुकुभ छंद

फिर माटी के सोंधी खुशबू,फिर झिंगुरा के मिठ बानी। मानसून मा रद रद रद रद,बादर बरसाही पानी। छेना लकड़ी चाउँर आटा,चउमासा बर जतनाही। छाता खुमरी टायच पनही,रैन कोट सुरता आही। नवा आसरा धरे किसानन,जाग बिहनहा हरषाहीं। बीज-भात ला जाँच परख के,नाँगर बइला सम्हराहीं। गोठ किसानी के चलही जी,टपराही परवा छानी। मानसून मा रद रद रद रद,बादर बरसाही पानी। मेछर्रा बत्तर कीरा मन,भुलका फूटे घर आहीं। बोटर्रा पिंयर भिंदोल मन,पँड़वा जइसे नरियाहीं। अहरू बिछरू के डर रहही,घर अँगना अउ बारी मा। बूढ़ी दाई टीप खेल ही,लइका के रखवारी मा। मच्छर बढ़ही…

पूरा पढ़व ..