सज्जन के संग : कोदूराम दलित के कुण्‍डलियॉं

सेवा दाई ददा के रोज करत तुम जाव मानो उनकर बात ला अऊर सपूत कहाव अऊर सपूत कहाव, बनो तुम सरबन साँही पाहू आसिरवाद तुम्हर भला हो जाही करथंय जे मन सेवा ते मन पाथंय मेवा यही सोच के करौ ददा-दाई के सेवा। धरती ला हथियाव झन, धरती सबके आय ये महतारी हर कभू ककरो संग न जाय ककरो संग

Read more

छन्द के छ : कुण्डलिया छन्द

चेत हरियर रुखराई कटिस, सहर लील गिन खेत देखत हवैं बिनास सब, कब आही जी चेत कब आही जी चेत , हवा-पानी बिखहर हे खातू के भरमार , खेत होवत बंजर हे रखौ हवा-ला सुद्ध , अऊ पानी-ला फरियर डारौ गोबर-खाद , रखौ धरती ला हरियर कवि के काम कविता गढ़ना काम हे, कवि के अतकी जान जुग परिबर्तन करिस

Read more