नवदिन नवरात्रि (घनाक्षरी छंद)

नवदिन नवराती , बरे दिया संग बाती । बघवा सवार होके , दाई हा बिराजे हे ।। नवदिन नवरूप , देय सबो हुम धुप ।  शंख चक्र गदा दाई , हाथ तोर साजे हे ।। धरे तिरशूल भाला , पहिरे हे मुंडी  माला । मन्दिर मा दाई तोर , मांदर हा बाजे हे ।। भगत खड़े दुवारी , लेके पान सुपारी । कर पूरा आस दाई , दिन तोर आजे हे ।। आनी बानी रूप धरे , मनौती ला पूरा करे । सेउक हे दाई सबो , जस तोर गात…

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