छंद : मदिरा सवैया

1–हे गणराज करौं बिनती ,सुन कष्ट हरो प्रभु दीनन के । रोग कलेश घिरे जग में,भय दूर करो सबके मन के । हाँथ पसारय द्वार खड़े भरदे घर ला प्रभु निर्धन के । तोर मिले बरदान तहाँ दुखिया चलथे सुखिया बनके। 2–राम रहीम धरे मुड़ रोवत नाम इँहा बदनाम करे । उज्जर उज्जर गोठ करे अउ काजर के कस काम करे । रावण के करनी करके मुख मा कपटी जय राम करे । त्याग दया तप नीति बतावय भोग उही दिन शाम करे । 3–काम करो अइसे जग मा सब…

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