अनुवाद : उत्तर कांड के एक अंश

अब तो करम के रहिस एक दिन बाकी। कब देखन पाबो रामलला के झांकी॥ है भाल पाँच में परिन सवेचन नारी। देहे दुबराइस राम बिरह मां भारी॥ सगुन होय सुन्दर सकल सबके मन आनंद। पुर सोथा जइसे कहे, आवत रघुकुल चन्द्र॥ महतारी मन ला लगे अब पूरिस मन काम। कोनो अब कहतेच हवय आवत बन ले राम॥ जेवनी आँखी अऊ

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दोहा के रंग : दोहा संग्रह

छत्तीसगढ़ मा छन्द-जागरण ये जान के मन परसन होईस कि नवागढ़ (बेमेतरा) के कवि रमेश कुमार सिंह चौहान, दोहा छन्द ऊपर “दोहा के रंग” नाम के एक किताब छपवात हे। एखर पहिली रमेश चौहान जी के किताब “सुरता” जेमा छत्तीसगढ़ी कविता, गीत के अलावा कई बहुत अकन छंद के संग्रह हे, छप चुके हे. कुछ दिन पहिली ईंकर छत्तीसगढ़ी के

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