रासन कारड

ऊंखर जउंहर होय, मुरदा निकले, खटिया रेंगे, चरचर ले अंगुरी फोरत बखानत रहय। का होगे या भऊजी, काकर आरती उतारत हस, राम राम के बेरा। नांगर धर के खेत रेंगत पूछत रहय छन्नू अपन परोसीन ल। चुनई लकठियाथे तंहंले कइसे मोहलो मोहलो करथे किरहा मन। तेंहा परिवार के मुखिया हरस कहिके, मोर नाव ले रासन कारड बना दीन। खुरसी पइन, […]

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कोउ नृप होउ, हमहि …

हमर राम राजा बनही, ये सपना हा आज के नोहे , तइहा तइहा के आए! त्रेताजुग म, जम्मो तियारी कर डारिन,फेर राम ल राजा नि बनाए सकिन कोन्हो, अउ दसरथ सपना देखत दुनिया ले बिदा घला होगिस! उहां के जनता के चौदा बछर, सिरिफ अगोरा म बीतगे! राम राजा बनही, त ऊंखर समसिया के निराकरन होही, इंखर दुख दरद गोहार […]

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