जनउला (प्रहेलिकायें)

1) बीच तरिया में टेड़गी रूख। 2) फाँदे के बेर एक ठन, ढीले के बेर दू ठन। 3) एक महल के दू दरवाजा, वहाँ से निकले संभू राजा। 4) ठुड़गा रूख म बुड़गा नाचे। 5) कारी गाय कलिन्दर खाय, दुहते जाय पनहाते जाय। 6) कोठा में अब्बड़ अकन छेरी, फेर हागे त लेड़ी नहीं। 7) अँउर न मँउर, बिन फोकला के चउँर। 8) नानचून टूरा, कूद-कूद

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सुकलाल प्रसाद पाण्डेय के छत्‍तीसगढ़ी वर्णमाला गीत

वर्णमाला के स्वर अ के अमली खूबिच फरगे। आ के आंखी देखत जरगे। इ इमान ल मांगिस मंगनी। ई ईहू हर लाइस डंगनी। उ उधो ह दौड बलाइस। ऊ ऊघरू ल घला बलाइस। ऋ ऋ के ऋषि हर लागिस टोरे। सब झन लागिन अमली झोरे॥ ए ए हर एक लिहिस तलवार। ऎ ऎ हर लाठी लिंहिस निकार ॥ ओ ओहर

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