छत्‍तीसगढ़ी जनउला (पहेली-प्रहेलिकायें)

बिना पूंछी के बछिया ल देख के, खोदवा राउत कुदाइस खेत के मेंड ऊपर बैठके, बिन मूंड के राजा देखिस (मेंढक, सर्प और गिरगिट) नानक टुरी के फुलमत नांव हे, गंवा के फुंदरा गिजरिया गांव (पैली, काठा ) काटे ठुड़गा उलहोवय नहीं (बोडरी ) एक ठन धान के घर भर भूसा (चिमनी ) कर्रा कुकरा, अंइठ पूंछी, अउ छू दिहीच, ते किकया उठीच (शंख) खा पी के जुठही बलावय (बहारी ) दिन मन अल्लर राहय, रात कन अडे़ राहय (छांद डोरी ) पेट भरी डउकी कुला ला चाटे (चोंगी )…

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