छत्तीसगढ़ गज़ल और बलदाऊ राम साहू

-डॉ. चितरंजन कर निस्संदेह गज़ल मूलत: उर्दू की एक काव्य विधा है, परन्तु दुष्यंत कुमार के बाद इसकी नदी बहुत लंबी और चौड़ी होती चली गई है। जहाँ-जहाँ से यह नदी बहती है, वहाँ-वहाँ की माटी की प्रकृति, गुण, स्वभाव और गंध आदि को आत्मसात कर लेती है, जैसे नदी अलग-अलग प्रांतों, देशों में बँटकर भी अपना नाम नहीं बदलती, […]

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छ्न्द बिरवा : नवा रचनाकार मन बर संजीवनी बूटी

चोवाराम वर्मा “बादल” जी के “छ्न्द बिरवा” पढ़े बर मिलिस । एक घव मा मन नइ माढ़ीस दुबारा पढ़ डारेंव। सिरतोन म अतका बढ़िया छन्द संग्रह हवय येकर जतका प्रसंशा करे जाय कम हवय । अब के बेरा म अइसन लिखइया आगे हवय जिंकर किताब ल पढ़ना तो दूर पलटाय के भी मन नइ होय अइसन बेरा मा बादल जी […]

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