छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल

थोरकिन तँहू जोहार बबा।
बाँटत हावै सरकार बबा।

दीही कहिथें बोनस अड़बड़
हाँथ ल अब बने पसार बबा।

घर-घर मा मोबाइल आगे
चुनई के हरे दरकार बबा।

झँगलू – मंगलू नेता बनके
ठाढ़े हे तोर दुवार बबा।

दुरिहा-दुरिहा राहे जउन मन
लपटत हावै, जस नार बबा।

पाँच बरस तरसाइन जउन मन
आज हावै, गजब उदार बबा।

उलट बाँसिया लागत हे सब
‘बरस’ कहे, बने बिचार बबा।

बलदाऊ राम साहू

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