छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल

आस लगा के बइठे हावस, हमरों कौनो पूछइया हे,
जेन बेटा ला पाले-पोसे, परान उही लेवइया हे।

खोर्रो मा सुतेस तैं अउ जठना जेकर जठायेस तैं हर,
आज उसी हर सबले बड़का, तपनी कस तपइया हे।

जेन खूँटा ला धरे हावस, उही हर होगे हे सरहा,
सरवन बन के कौन तोला, तीरथ-बरत करइया हे।

सातधार दूध पियायेस, उहीमन हर होगे हे बैरी,
काकर कर तैं दुख ला गाबे, धन के सबो रपोटइया हे।

बलदाऊ राम साहू

संघरा-मिंझरा

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