जस गीत – काली खप्परवाली

काली खप्परवाली आगे ,काली खप्परवाली
लप लप लप जीभ लमावत, रूप धरे विकराली

सब दानव ल मरत देख के, शुम्भ निषुम्भ गुस्सागे
चंड मुंड कहाँ हौ कहिके , जल्दी तीर म बलाए
जावव पकड़ के तुम दुर्गा ल , लावव मोर आगू म
साम दाम अउ दंड भेद से , ले आहू काबू म
सीधा सीधा नइ आही त , बाल पकड़ के खीचैं
नइच मानही तुरते ओकर , लहू बोहाहू लाली

शेर उपर बइठे हे माता , अउ मुच मुच मुसकावय
ओतके बेरा चंड मुंड हॅ , सेना लेके आवय
चंड मुंड आए देख के , माता हँ गुस्सागे
आँखी होगे लाल लाल अउ , देह सबो करियागे
घपटे बादर सहीं केस ल , खोल जमो छितरादिस
मुड़ी मुड़ी के माला पहिरे , परगट भइगे काली

काट काट के दानव ल , काली खप्पर म जलावै
काट के मुड़ी खून पियै , कतको ल कच्चा खावै
हाहाकार मचे दानव म, सब चिल्लावत भागे
दानव मन के हाल देखके , चंड मुंड खिसियागे
गुस्सा के मारे थर थर काँपत , काली कोती दउड़िस
चंड मुंड ल दउड़त आवत , देखत हावय काली

चंड मुंड अउ काली के बीच , जम के होथे लड़ाई
काँपे लागिस धरती अंबर , खून के नदी बोहाई
महा मयावी चंड मुंड , छिन म धरती अकासा
खडग चलिस जब माँ काली के, उंकर पलट गे पासा
दउँड़ा दउँड़ा के जब मारिस , काल घलो थर्रागे
चंड मुंड के सिर काट के नाचे लागिस काली

धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346

संघरा-मिंझरा

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