गीत : चौरा म गोंदा रसिया, मोर बारी म पताल हे

चौरा म गोंदा रसिया
मोर बारी म पताल हे
चौरा म गोंदा ।

लाली-गुलाली छींचत अइबे राजा मोर
मैं रहिथंंव छेंव पारा म पूछत अइबे ।
चौरा म गोंदा …

परछी दुवारी म ठाढेच रहिहंव राजा मोर
मन महल म दियना बारेच रहिहंव ।
चौंरा म गोंदा …

छिन-छिन तोरे बिन बरिस लागे राजा मोर
मैं देखत रहूँ रद्दा तैं खिंचत आबे ।
चौंरा म गोंदा … :

ओ मेरे रसिया ! मेरे घर में चबूतरे पर गेंदे के फूल हैं। मेरे राजा, मेरे प्रियतम! मैं लाली- गुलाली की बस्ती के अंतिम छोर पर रहती हूँ। तुम पूछते आना..

संघरा-मिंझरा

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