कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी मोर बिचार

Sanjeeva Tiwariपाछू 29 जनवरी के दिन छत्‍तीसगढ़ राजभाषा आयोग अउ स्‍वामी स्‍वरूपानंद शिक्षा महाविद्यालय, भिलाई के संघरा उजोग ले ‘कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी के स्‍वरूप अउ संभावना’ विषय म गोष्‍ठी के आयोजन होए रहिसे। ये कार्यक्रम म छत्‍तीसगढ़ी के जम्‍मो माई सियान मन सकलाए रहिन हावय। संगोष्‍ठी म सब मन अपन अपन बिचार रखिन अउ संभावना के उप्‍पर गोठ बात ला आघू बढ़ाईन।

ये संगोष्‍ठी म कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी का आय तेखर उप्‍पर घलो प्रकास डाले गीस, कइ झन झोंकिस त कइ झिन टोंडा हन दिन। मोर संगें संग कई झिन संगवारी मन ये बात ला बने सहिन नइ धरिन तईसे लागथे। ‘कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी’ सबद उप्‍पर गहिर ले सोंचें के पाछू समझ म आइस कि भाषा के ये रूप के माने हमर चलती सोंच ले आने हावय। संगी मन मेर अपन मती बांटे खातिर मैं येला लिखत हांवव आपो मन येला बने फलियार के सोंचव।

मोर मति अउ मोर पढ़े हिन्‍दी भाषा बिकास के पुस्‍तक मन के अनुसार भाषा ला भाषा-विज्ञानी मन सामान्य, साहित्तिक अउ प्रयोजनमूलक ये तीन रूप म बांटथें। कहूं हम अपन भाषा ला इही तीन रूप म बांटन त पहिली रूप सामान्‍य छत्‍तीसगढ़ी म हमर बोलचाल के छत्‍तीसगढ़ी आथे। दूसर साहित्‍य के छत्‍तीसगढ़ी आए जउन म हमर कहिनी, कबिता, गीत आदि आथे। अब रहिस तीसर प्रकार के छत्‍तीसगढ़ी तेखरे बिकास के गोठबात राजभाषा आयोग अड़बड़ दिन ले करत हावय। हमर भाषा ला जन जन के सम्‍मान देवाना हावय त हमला-आपला इही छत्‍तीसगढ़ी भाषा के बिकास करना-करवाना हावय। हमर भाषा के इही रूप कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी आय माने प्रयोजनामूलक छत्‍तीसगढ़ी।

सामान्य छत्‍तीसगढ़ी म हमन अनौपचरिक भाषा के प्रयोग करथन, हम संझा बिहनिया के काम म इही भाषा के प्रयोग, सहज रूप ले करथन, काबर कि ये भाषा के ज्ञान हमला बचपन ले मिले रहिथे। साहित्यिक छत्‍तीसगढ़ी म हमला साहित्य के अलग अलग विधा के अनुरूप भाषा अउ शब्‍द मन ला स्वरूप देहे ला पड़थे। सुन्‍दरता के बिबरन अउ ओखर अनुभव, सामाजिक स्थिति, सांस्कृतिक अनुभूति ला सुघ्‍घर शब्द अउ अलंकार संग कलात्मक शैली म प्रस्‍तुत करे बर परथे। इन दूनों रूप के छत्‍तीसगढ़ी हमार मान आए, येखर प्रयोग हम मूल छत्‍तीसगढ़ी बोलईया मन नई त छत्‍तीसगढ़ी भाषा के जानकार मन करथन।

भाषा ला चारो मुड़ा बगराए बर अउ इहॉं रहईया जम्‍मो जन के मुह म हमर भाषा ल बसाए हमला थोकिन भाषा के कसौटी म ढील देहे ला परही। इही सोंच ह कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी के बिकास के असल मंतर बनही। कोनो काम ला करे खातिर, आफिस म, बजार म, बैंक म, डाकघर म जउन भाषा के प्रयोग होही उही कामकाजी भाषा कहलाही। जब हम अउ गैर छत्‍तीसगढ़ी भाषी मन, छत्‍तीसगढ़ी के प्रयोग जम्‍मो जघा जीविका चलाए खातिर करे लागहीं तभे छत्‍तीसगढ़ी कामकाजी भाषा के स्वरूप धरही।

सबले पहिली हमला कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी के रूप ल सरल अउ आसानी ले समझ म अवईया बनाये ल होही। राजभाषा म कठिन अउ कम सुने जात शब्‍द मन ल बउरे ले, राजभाषा ल अपनाए म लोगन के संकोच बाढ़ही। हमर भाषा के सालीनता अउ मर्यादा ला बनाए रखत हमला भाषा ल सुबोध अउ सुगम बनाना आज के समें के मांग आए।

जब-जब सरकारी कामकाज म छत्‍तीसगढ़ी शब्‍द मन के अनुवाद करे के उदीम करे जाही बात बिगड़ही, येखर ले भाषा के स्‍वरूप अउ जटिल, अउ कठिन हो जाही। अच्‍छा अनुवाद म भाव ल समझ के वाक्‍य के रचना करना जरूरी हे न के हरेक शब्‍द के अनुवाद करत, जतर कतर वाक्‍य के निर्माण करे के। बोलचाल के भाषा म अनुवाद करे के ये अर्थ आए कि, ओमा आन भाषा मन जैइसे उर्दू, अंग्रेजी अउ आन प्रांतीय भाषा मन के लोकप्रिय शब्‍द घलव बरोब्‍बर प्रयोग म लाए जाए। हमला ये बात गांठ बांध के धरना हावय कि भाषा के शुद्ध रूप साहित्‍य जगत बर आए, भाषा के लोकप्रिय अउ मिश्रित रूप बोलचाल अउ कामकाज बर आए। ये बात ला हमला समझे ला परही, इही समझ ह हमला कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी के बिकास म उदार बनाही।

संगें संग हमला अपन भाषा ला जन जन के भाषा बनाए खातिर येला कामकाज के भाषा बनाए ल परही। अउ हमर भाषा खातिर कोनो ला बिना जोजियाये, उखर मन के मन म ये भाव जगाये ल परही कि मोला छत्‍तीसगढ़ी भाषा के प्रयोग करे बर परही। ये ह तभे होही जब हमन कामकाज म स्‍वयं छत्‍तीसगढ़ी के प्रयोग करबोन; अइसन म उमन ला घलव हमर जवाब छत्‍तीसगढ़ी म देहे ला परही। पहिली हमला अपन कामकाज के भाषा छत्‍तीसगढ़ी बनाए ला परही, तभे एखर बारे म सोंचें जा सकत हावय।

संजीव तिवारी

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