उल्‍हुवा पान : फिल्‍म समीक्षा – छत्तीसगढ़ी फिलिम राजू दिलवाला

फिलिम के हीरो प्रकाश अवस्थी जी के पहचान फिलिम में एक अलगे अंदाज म होइस हवे। ये फिलिम म धरम और जात बिरादरी ऊंच नीच के भावना ले दुरिहा पियार अउ मया के जेन रूप होथे तेन ला दिखाय गे हवे, अउ ये फिलिम म हमर स्वच्छ भारत अभियान के जेन मिशन हे तेखर बारे में भी बने किसम से समझाय गे हवे। फिलिम के गाना मन हर मज़ेदार हे अउ जेन लोकेशन हे तेहु भारी सुघ्घर हवे। फिलिम म मनाली के बर्फीला घाटी के जेन सीन दिखाय हे ते सीन मन फिलिम के रौनकता ला भारी बढा दे हवे। फिलिम के जम्मो कलाकार मन अपन अपन रोल म बहुत जँचत रहिन फेर फिलिम म हीरोइन के पिताजी (पुष्पेंद्र जी) के जेन रोल रहिस तेन जतका दमदार होना रहिस तेखर ले कुछ कम दिखिस, ये रोल हर भी फिलिम के मेन किरदार रहिस तेखर हिसाब से ज्यादा मज़ा नई आइस, लेकिन फिलिम हर हंसी, प्यार अउ मार धाड़ ले भरे हावय।




फिलिम म मोला सबले ज्यादा मज़ा हीरो के जेन संगी रहिस न जेन हर हर बात म कहय के ऐ समस्या के काय समाधान हे। तेखर रोल हर लगिस अउ फिलिम के हीरो के हीरोइन (शिखा चितांबरे जी) के घर जाके ओखर मन के घर म राउत नाचना हर लागिस। लेकिन फिलिम में एक बाप हर अपन बेटी ल जानसुधा मार सकत हे ता ओखर मयारू घर गोसाइयाँ के जिंदा बाहचना समझ म नई आइस। मोला लागथे के बंदूक म गोली ह एके ठक बहाचे रहिस या ये हर फिलिम के दूसर भाग बने के ओर संकेत देत हे। लेकिन कुल मिलाके फिलिम हर मया दुलार ले बने हे, जेन हर हमन ला सब धरम ले सम्मान करे ला सिखाथे।

रिंकू अग्रवाल
चांपा, छत्‍तीसगढ़
मो. 909822237


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