छत्तीसगढ़ी गज़ल

भाषण सबो देवइया हावै।
सपना गजब देखइया हावै।

कौन इहाँ जी सच ला कहही
सब के सब भरमइया हावै।

काकरो मुँह में थाहा नइ हे
मर्यादा कौन निभइया हावै?

देस के चिंता हावै कौन ल,
गड़बड़ गीत गवइया हावै।

सबरी कस रद्दा हम देखथन
राम कहाँ ले अवइया हावै?

थाहा=नियंत्रण

बलदाऊ राम साहू

संघरा-मिंझरा

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