अड़हा रईतिस तेने बने ददा

हमन ल सुने म बढ़िया लगथे की फलाना के लईका ह बिदेश में रहिथे अऊ बड़का कंपनी म मेनेजर हाबय, पईसा तको अपन देश ले जादा मिलथे। त अईसने मोर ममा गाँव के एक किसान जेकर नाव हाबय किसुन तेकर लईका परमेश्वर बड़ होशियार, एकलौता रिहिस, किसुन ममा ह ओकर सबो फरमाईस ल पूरा करय। लागा-बोड़ी करके वोला इंजीनियर के पढ़ाई करवईस। इंजीनियर के डिग्री मिलीच तहा ले परमेश्वर ह नऊकरी बर एती-तेती हाथ पाव मारिस। नऊकरी लगय तहा ले कुछ दिन करय फेर छोड़ दय। दाई ददा ह समझावय फेर परमेश्वर ह ककरो नई सुनय। अपनेच मन के करय, दिन अईसने पहावत गिस अऊ एक दिन ओकर नऊकरी बिदेश के कोनों बड़का कंपनी म लग जथे।




ददा दाई के रोवई ल देखके पड़ोसी मन बोलिस तोर बेटा के नऊकरी बिदेश म लगे हे, तुमन ल खुशी मनाना चाहिए त तुमन रोवत हौ। हमर गाँव अऊ समाज बर बड़ा गरब के बात हे, आजकल का देश, का बिदेश जहाज चढ़हिस तहा ले एके कनिक मा बिदेश ले देश आ जही। जावन दे ग किसुन भाई कईके सबो गाँव के पढ़े लिखे मनखे मन समझईस। परमेश्वर ह अब बिदेश म नऊकरी करे बर धर लिस। शुरू-शुरू में साल में तीन-चार बार बिदेश से गाँव आवत रिहिस। धीरे धीरे गाँव आय बर बंद कर दिस। फोन में हाल-चाल पूछ लय तहा ले मिटका दय। दाई ह ओकर काहय बेटा तोर बर बहु खोजे हौ तोर बिहाव एसो करे बर हे। परमेश्वर ह अपन दाई ल बोल दय पांच साल अभी नई करव कईके, पांच साल अईसने गुजर गे अब तो फोन करय त फोने ल काट दय।




गजब दिन बाद पता चलिस कि परमेश्वर ह उहेंं के लड़की सन बिहाव कर डाले रिहिस अऊ एक लईका तको होगे रिहिस। ये खबर ल सुन के किसुन के हाथे पाँव जुड़ागे, अब तो न बात होवय न तो पईसा भेजय किसुन अऊ ओकर डोकरी ह चिंता फिकर म बस दिन रात गुनत रहय। लईका के मया म महतारी के रोवई-रोवई म आंंखी ह अंधीरियागे, अब तो अईसे होगे बुढत काल म करलई होगे। किसुन ह सोचे बर धर लिस का फायदा अईसन पढ़ई लिखई से जेन पढ़ई म संसकार नईये। अपन दाई ददा से जेला मया नईये, अपन माटी के जेन ल मोल नईये, जेला दाई ददा के बुढ़ापा के फिकर नईये, अपन सुख अऊ पेट ल फोरा पार के जेन लईका ल लायक बनायेव आज वोहा अपन संसकार अऊ संसकिरती ल भुलागे हे। तेकरे सेती काहत हौंं अड़हा रईतिस तेने बने, कम से कम एक लोटा पानी ल तो पियातिस, दाई के कोरा के करजा ल चुकातिस। किसुन ह अतेक टूट गे रिहिस संझा बिहनिया स्कुल के दुवारी में बैठके सबो लईका मन ल काहय, बेटा हो पढव त अईसे पढव जेमे संसकार रहय, अपन दाई ददा के जेमे मान संमान होवय, अऊ अपन देश के माटी से लगाव रहय, नईतो अड़हा राहव तेने बने।

विजेंद्र वर्मा अनजान
ग्राम-नगरगाँव (रायपुर)
मोबाइल-9424106787



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2 comments

  • सगन लाल साहू

    सही है वर्मा जी संस्कार और संस्कीरति माँ बाप के सेवा ल नई भुलाना चाहिए बहुत प्रेरणा दायक कहानी है

  • महेन्द्र देवांगन माटी

    बहुत बढ़िया लागीस संगी कहानी ह । सिरतोन बात ल लिखे हस।

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