कहानी – बड़की बहू

कमला के बिहाव होय 24 बच्छर होगे हे।ओ हा अपन बड़े नोनी के बिहाव घलाव कर डारिस।ओकर नानकुन बेटी नतनीन घलो आगे,फेर कमला के बुढ़ी सास अऊ ओकर सास ह आज ले गारी देयबर नी छोड़िन अउ न कमला ल बड़की बहू मानिन। कम पढ़े लिखे घलो नई हे कमला! अपन मईके के पहिली नोनी रहिस जौन दू कोस रोज साइकिल म आन गांव जाके 8वीं पास होय रहिस ।तहसील मा चपरासी बर नउकरी के चिट्ठी घलो आय रहिस,फेर दाई ददा मन मना कर दिस।अऊ लगती अठारा बच्छर मा परोसी गांव के पोस्ट मास्टर संग बिहाव करदिन। पोस्ट मास्टर, सिधवा अउ गुनीक मनखे आय।चार भाई मा सबले बड़का रहिस ।तनखा कम होय ले अपन सब सऊंख ल मार के घर के खरचा चलाय।कमला ल बड़ मया करय। दिन भर दफ्तर म काम करय।संझा बजार हाट करत अउ कमला के बताय जिनीस ल बिसात घर आतिस।ओकर बहिरी आवक के कोई रद्दा नई राहय। तभो ले खुश रहय।
बड़की बहू कमला हा, बिहाव के दूसर दिन ले बिहनिया ले उठ के चाय पानी से लेके रतिहा के जेवन तक बुता म बिना थिराय लगे राहय । दुआर-अंगना बुहारी, पानी भरना, भातसाग रांधना, कपड़ालत्ता कांचना संगेसंग सास,बुढ़ीसास के सेवा करना रोज के बुता रहय ।अतका करे के पाछू घलो बुढ़ीसास, सास के तुतारी अउ हुदेसा ओला रोज मिलय। बेरा होवत दू झन बेटी ओकर कोख ले जनम घलाव धरलिन।बेटी-बेटी बियाय हस कहिके सासमन अड़बड़ सुनाइस।दिन बीतत बेर नइ लगय।पोस्ट मास्टर पांच बच्छर मा अपन तीनो भाई मन के बिहाव घलाव कर दिस।कमला के तीन झन देरानी आगे।चार देरान जेठान एक दूसर ल बने मया करे।बड़े जेठानी ह दीदी अऊ महतारी असन होथय कहिके सबो मन ओला सनमान देवय।काबर कि सबले पहिली ओहा ये घर म आय रहिस। काबर कि पाछू अवइया देरानी मन ल सिखाय बताय बर उही आघू मा रहिथे । कमला घलाव अपन देरानी मन ल सिखायबर पाछू नई घूंचय। काय साग बनाना हे, कतका जेवन रांधना हे ये सबो ल कमला ह देरानी मन ल बताय। येकरे सेती कमला के सास अऊ बुढ़ी सास ह ओकर ले मुहूं फुलोय राहय। कतको घांव तो मुहूं फटकार के कहि देवय कि तहीं ह ईंकर सास बन गे हस ओ कमला। घेरी बेरी के ताना मरई ल सुनके कमला के आतमा अऊंट जाय। अपन गोसईया ल एक दू घांव बताये घलाव रहीस फेर ओ धियान नई करीस। तब कमला हदास होगेअउ बताना छोड़दिस।
भगवान के मरजी आय कि कमला के भाग फरियाइस । पोष्टमास्टर के दूसर जगा तबदिली के चिट्ठी आगे। अपन चारो माई पिला नवा गांव मा चल दिन। उंखर जाय ले घर के बेवस्था बिगड़ गे।सबो बहूमन अपन-अपन मा बड़की होगे। तीनों भाई अपन-अपन सुवारी के कहना माने लगिन।घर मा अब काय साग चुरही तेकर बतइया नइ हे।कोन रांधही, कोन बरतन मांजही, कोन लिपही बहारही, कोन चाय बनाही, कोन पानी भरही, कोई ठिकाना नइ हे।सब बहू अपन मरजी के मलकाइन बनगे। बुढ़ीसास अउ सास के सेवा जतन करई तो दूरिहा,बेरा मा उनला खायबर नइ मिलत हे।
एती कमला अपन परिवार संग खुस हे, ओकर दूनो बेटी पढ़ेबर जात हे। वो हा अपन घर मा सिलई मसीन चलात हे,अउ गांव के गरीबिन बेटीमन ल सिलई सिखाथे। गांव मा अबड़ेच मानगउन होवथे। परिवार ले दुरिहाय के दुख ल कमला एक बच्छर मा भुलागे।फेर गांव के,घर के, सास-बुढ़ीसास, देवरानी सब के सोर खबर लेत रहय। घर के हालचाल ल जानके ओकर हिरदे मा पीरा हो जाय।
चार बच्छर के पाछू, कमला ल दू दिनबर गांव जाय के मउका मिलिस। गांव के गोतियारी ले पंचनहावन के नेवता आइस। मास्टर ल छुट्टी नइ मिलिस त कमला ल जायबर परगे। गजबेच दिन मा गांव आय ले सब नवा- नवा दिखे लगीस। कमला अपन घर के मोहाटी मा अमरीस। घर के हाल ल देख के अकचका गे। एक मन मा लागिस,का इही हमर घर आय? दुवार मा कचरा परे हावय, बहराय नइ हे। गोबर चोता सुखात परे हे। कपाट ल ढकेल के भीतरी खुसरिस, तब सब सुनसान। जब देरानी मन ल हूंत कराइस तब कोनो नइ निकलिस। कमला समझिस सब गोतियार घर गय होही।झोरा ल परछी मा अरोके गोतियार घर गइस। उहां सबो गांव के नत्ता गोत्ता मन मिलीन। सबोझन ले भेंट पलगी होइस।फेर अपन एकोझन देरानी ल नइ देखके ओला थोकिन भुरभूस होइस।तरीया के कार्यकरम निपटाके अउ खा पीके घर लहुटिस।
एती बड़की बहू ल आयहे कहिके सुने कमला के सास अउ बुढ़ीसास ओकर बाट जोहत रहय। कपाट ल ढकेल के निगते साथ परछी के खटिया मा सुते दू झन डोकरी उपर नजर गिस। उकर हाल ल देख के कमला के आंखी डबडबा गे। ओकर सास ह कमला…. काहत गोहार पार के रो डारिस। खटिया मा पसरे सियनहिन हा, उठे बर होइस फेर उठ नइ सकिस। ओकर आंखी के आंसू के धार कान के बाजू ले गाल मा होत मुड़सरिया ल फिलोत रहय। सुसकत, बुढ़ीसास ह कहिस- बड़दिन लगादेस कमला ….! कमला अपन दूनो सास के हाल देखके कलबला गे, ओला अइसे लगीस कोनो ओकर गाल मा दू थपरा मार दिस। तीनों झन रो लीन, फेर घर के सबो हाल चाल सास बताइस। ओकर सबो देरानी मइके गय हवय जौन आज ले लहुटे नइ हवय। रंधनी खोली मा जाके कमला बाहरिस बटोरिस।चूल्हा ल लीप बहार के रतिहा कुन दार-भात रांध के दूनो सास ल खवाइस।उंकर हाथ पांव लगरिस।तीनों झन एके खोली मा सुतीन।दूसर दिन बिहनिया उठ के कमला दुवार,अंगना, घर के साफ सफई करीस। अब घर हा मनखे रहिथे तइसे दिखे लगिस।सुघ्घर चिला रोटी बनाके अपन सास, बुढ़ीसास ल खवाइस।मंझनिया गोतियार घर ले भात साग लान के सासमन ल खवाइस।देरानी मन आजो नइ आइन। संझा गोतियार घर ले बिदा मांग के आ गे ।कमला अपन सास ल बताइस कि बिहनिया के गाड़ी मा घर जाहूं। ओकर सास के मुहें ले फेर कमला बर परेम भरे गारी निकलगे। हमनल इहां नरक भोगे बर छोड़े हस ओ कमला! तोर देरानी मन ल बने सीखो के गे हस। दाना दाना बर तरसात हेओमन।काय पाप करे हन,कि बिधाता हमला तोर असन बहू ले दुरिहा दिस। बिहनिया कमला चल दिस।
कतरो घांव अउ आईस, फेर हर घांव अपन सास के टेचरही गोठ सुनेच के लहुटय। आज 17 बच्छर होगे ऐ गांव ले गय। अपन बेटी के बिहाव घलो नवां गाँव मा करिस।ओकर सास, बुढ़ीसास सरग जाय बर खटिया मा पचत हे । बड़की बहू कमला हर बच्छर दू दिन बर आथे अपन सास के गारी खायबर।इही मा दूनो के मया समाय हे।

हीरालाल गुरुजी “समय”
छुरा, गरियाबंद

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