हमर पूंजी

दाई के मया अऊ ददा के गारी।
बस अतकी हमर पूंजी संगवारी।
सुवारी के रिस अऊ लईका के किलकारी।
बस अतकी हमर पूंजी संगवारी।
कोठी भर पीरा अउ भरपेट लचारी।
बस अतकी हमर पूंजी संगवारी।
हिरदे के निरमल;नी जानन लबारी।
बस अतकी हमर पूंजी संगवारी।
कोठा म धेनु अऊ छोटकुन कोला बारी।
बस अतकी हमर पूंजी संगवारी।

रीझे यादव
टेंगनाबासा (छुरा)

संघरा-मिंझरा

4 Thoughts to “हमर पूंजी

  1. Shiva palema

    Bahut khub yadav ji

  2. Rupendra Kumar

    Chhattisgarhi bhakha maya ke bhakha hai…
    Ki Apne vani me sajo ke rakhane ki aavshyakta hai…

  3. Rupendra Kumar

    Nice Chhattisgarhi bhasha..

  4. Pushpraj

    Bahut sugghar yadaw bhaiya ji

Leave a Comment