हिन्दी साहित्य के महान साहित्यकार उपन्यास सम्राट, कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद

हमर देस ह बैदिक काल ले आज तलक साहित्य के छेत्र म समरिध हावय चाहे वो जब हिन्दीर भाखा के जननी देव बानी संसकिरीत रहय जेमा बालमिकी के रामायन होवय, चाहे बेदबियास के महाभारत, चाहे कालीदास के अभिज्ञान साकुंतलम होवय। ओखर बाद जब हिन्दीं भाखा अवतरित होईस त ओमा घलो एक से बढ़के एक साहित्यकार हावय। हिन्दीं भाखा के भीतर म घलो अवधि, बरज, खड़ी बोली,छत्तीसबढ़ी भाखा मन आथे।

आचार्य रामचंद्र सुक्ल जी ह हिन्दी3 साहित्य के इतिहास ल चार काल म बांटे हावय बीरगाथाकाल जेला आदिकाल घलो कईथन, भक्तिकाल, रीतिकाल अउ आधुनिक काल। आधुनिक काल के अंतरगत प्रेमचंद्र युग आईस जेमा प्रेमचंद्र जी के रचना ल हमन पढ़थन। प्रेमचंद्र जी हिन्दीर साहित्य के परमुख साहित्यकार ये। वो ह साहित्य ल आम जनता से जोड़िस जेखर कारन उखर रचना ह साहित्य के मुंह बोलत चित्र बन गईस। साहित्य ह समाज के दरपन हो थे अउ वो दरपन प्रेमचंद्र जी ह समाज ल अपन रचना के माध्यम ले दिखाईस।

प्रेमचंद्र जी के जनम 31 जुलाई बछर 1880 म बाराणसी म लमही नाव के गांव म होय रहिस अउ 8 अक्टूबर बछर 1936 म वो ह सरगबासी होगे। उंखर असली नाव धनपतराय रहिस। सुरू-सुरू म ऊंह नवाबराय के नाव ले ऊर्दू म लिखत रहिस। पर बाद म वो ह हिन्दीर के परभाव से हिन्दीय भाखा म अपन साहित्य रचना करे लगिस। प्रेमचंद्र जी ह कुछ पत्र-पत्रिका के संपादन घलो करे रहिस। सरस्वती नाव ले अपन परकासन संस्था घलों बनाये रहिस।

पे्रमचंद्र जी परमुख रूप से कथाकार रहिन। वो ह आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी कथाकार ये। वो ह समाज के सभी वर्ग ल अपन रचना म अस्थान दीहिस। निरधन,पीड़ित अउ सरवहारा के परति उखर बिसेस सहानुभूति रहिस। वो ह सोसक समाज के अतियाचार ल घलो खुल के अपन रचना म चितरन करिस।

गांव के जीवन के चितरन म तो पे्रमचंद्र जी ह कमाल कर दे हावय। प्रेमचंद्र जी के बिसाल कहानी-साहित्य ल देखते हुए कहे जा सकत हे के उंखर कहानी म जन-साधारन के जीवन के समान्य पिरिस्थिति, मनोवृत्ति अउ समस्या के चितरन ह बहुत ही मारमिक ढंग ले होय हावय।

प्रेमचंद्र जी के रचना म उपन्यांस म – वरदान, सेवासदन, प्रेमाश्रय, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, प्रतिज्ञा, गबन, गोदान, मंगल सूत्र (आधा हावय)।

कहानी संग्रह- प्रेमचंद्र जी ह लगभग 300 कहानी लिखिस जे हर मानसरोवर के आठ भाग म संकलित हावय। दो बैलो की कथा, पंच परमेश्वर, आत्माराम, बड़े घर की बेटी, रानी सारंधा, शतरंज के खिलाड़ी, सुजान भगत, पूस की रात, ईदगाह, कफन, बूढ़ी काकी, जइसे कहानी मन परसिद्ध हावय।
नाटक म – कर्बला, संग्राम, प्रेम की बेदी।
निबंध संग्रह म – कुछ बिचार।

प्रेमचंद्र जी के पूरा साहित्य ह समाज सुधार अउ रास्ट्रीय भावना ले प्ररित हावय। उंखर कोनो रचना चाहे वो ह उपन्यायस होय चाहे कहानी वोखर नायक ह किसान, मजदूर अउ मध्यम वर्ग के प्रतिनिधित्व करथे। ओखर उपन्यांस गोदान के नायक होरी रहे या पूस की रात के नायक हलकू रहय। जेमा नायक ह समाज के सोसक वर्ग के परति सामना करत दिखथे। वोखर हर रचना म तत्कालीन समाज के रूढिवादी परंपरा अउ जमींदारी परथा के बिरोध दिखाई देथे।

प्रेमचंद्र जी के कहानी,उपन्यारस के धारावाहिक घलो बने रहिस जेला दूरदरसन ह परसारन करे रहिस। जेमा प्रेमचंद्र जी के रचना के नायक के रूप म पंकज कपूर ह रोल निभाय रहिस अउ बहुत ही अच्छा जचे रहिस होरी अउ हलकू के रोल म। प्रेमचंद्र जी ह अपन हर रचना ल येतका समरपित भाव ले रचय के उंखर रचना के हर पात्र ह fजंदा हो के पाठक के हिरदय म धड़के लग जाथे। इंहा तक के यदि पात्र ह ब्यथित अउ समस्या ग्रस्त हावय त पाठक घलो के आंखि ले आंसू बह जाथे।

भाखा सैली – प्रेमचंद्र जी के भाखा सरल अउ मुहावरेदार हावय। प्रेमचंद्र जी ह मुख्य रूप ले वरनात्मक, बियंग्यात्मक अउ भावात्मक सैली ल अपनाय हावय।

येखर से स्पस्ट हो जाथे के प्रेमचंद्र जी ह हिन्दीस साहित्य के सर्वश्रेश्ठ साहित्यकार ये। वो ह हिन्दीग साहित्य ल देस-बिदेस म पहिचान दिलाइस। वो ह हिन्दीर कहानी साहित्य के कल्पतरू अउ उपन्याटस साहित्य के सम्राट अउ कलम के सिपाही माने जाथे। वो ह रास्ट्र परेम, मानव कल्यान, अउ समाज सुधार के संदेस दे हे हावय। वोखर हर रचना ह मानव जीवन के कोनो न कोनो हिस्सा ल दिखाथे।

प्रदीप कुमार राठौर ‘अटल’
ब्लाक कालोनी जांजगीर
जिला-जांजगीर चांपा (छ.ग.)

संघरा-मिंझरा

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