प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – आस्था, अंधविश्वास, बीमारियाँ

आस्था -देवी-देवता के नाम -सांहड़ा देवता, काली माई, चंड़ीदेबी, शीतला माता, देबीदाई, देंवता, मंदिर, भगवान, गणेश, महादेव, पारबती, राम, छिता, लछिमन, बजरंगबली, हनमान, बिसनू, लछमी, सरसती माई, महामाया, बमलेसरी, कंकालीन, बूढिमाता, भैंरो बाबा, सवरीन दाई, ठाकुर देवता, संतोषी दाई, बजारी माता, बामहन देवता, पंडित, पुजारी।

सामग्री – उँवारा, जोत, नरियर, परसाद, फूल-पान, हूम-जग, चढोतरी, सेंग, बईगा, पूजा-पाठ, हवन, जग, कलस, कलावा, गंगाजल, नवदुरगा, जंवारा, कलस, कुंवारीभोज, पंडा, गोबर, चउक, आरती।

अंधविश्वास / रूढिवाद – मसान, परेतिन, परेत, जिन्द, टोना, बरमभूत, करिया मसान, सरपीन, सकसा, मटिया, बधघर्रा, मुडकट्टी, टोनही, टोनहा, बइगा, भट्टसासूर, फूंकइ-झरड, घर कोठा बंधइ, नजर उतर, टोना-टोटका, बदना (मन्नत), हूम-धूप, हूम-जग, बन्दन, नरियर, लिमउ, काजर, तेल, दिया, मिरचा, फरिया, पुतरी-पुतरा, केंस, पूजइ, बाना, चूरी-चांकी, सुपली, टोपली, कसरहा आदि।

बीमारियाँ- कुकुरखांसी, मुड्पीरा, रसरसहा लागथे, सूलपीरा, जर, कानपीरा, हाथ-गोड पीरा, माता, आंखी आए हे, धुसधुस ले लागत हे, मसमसावत हे, अलकरहा लागथे, लोकवा, संसो /मुड़धंगी, खजरी, पोंकरी, धराधुक्की, गलफुलवा, आदि का प्रयोग।

शोधार्थी – राजेन्‍द्र कुमार काले, रायपुर. निदेशक – चित्‍तरंजन कर

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संघरा-मिंझरा

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