प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – तीज-त्योहार और उपकरण

तीज-त्योहार – हरेली, खम्हरछठ (हलषष्ठी), गणेश चतुर्थी, आठे कन्हैया, राखी, अक्षयतृतीया, तीजा-पोरा, पीतर, दसेरा, सुरूत्ती, देवारी, गोबरधनपूजा, छेरछेरा /माघीपुन्नी, होरी, गौरा-गौरी, अक्ती (पुतरी-पुतरा के तिहार), गुरबारी, होली, जेठउनी, जुमतिया, नागपंचमी।

उपकरण – उपकरण के अंतर्गत घरेलू उपकरण, कृषि संबधी उपकरण, काम करने के औजार, सुरक्षा संबंधी हथियार आदि को अध्ययन की दृष्टि से अलग-अलग वर्गों में बाँटा जा सकता है।

घरेलू उपकरण एवं वस्तुएँ – बटकी, सील-लोढा, चौकी-बेलना, थारी, लोटा, माली, परात, पैना, पसउना, बांगा, करछूल, कराही, झारा, लकरी, छेना, गुंडरी, थौना, चिमनी, कंडिल, दीया-बाती, जांता, ढेंकी, मूसर, खौना, चन्नी, सूपा, बहिरी, पोतनी, खरहारा, टठिया, परई, तसला, हंडा, गोरसी, चूलहा, सिगरी, चिमटा, अंगरा, माचिस, ।

कृषि उपकरण – कुदारी, राँपा, असकूड, टेंकनी, टेंवना, ढांक, पीढा, बेलन, कोर्रा, तूतारी, कलारी, चतवार, साबर, नांगर, मेंडरी, फर, मूठ, टंगिया, खूंटी, जूडा, सूमेला / पंचारी, जोंता, डांडी, कोल्लर, पटनी, नाहना, असकूड, चक्का, बाठ, पक्ती, खोल, हंसिया, रपली, पुठी, आरी, मुडी, असकूड, गुरदा, खिला, बिंधना।

औजार – उस्तरा, हंसिया, पेसकस, पेनचिस, पना, हथौरी, घन, छिनी, पटासी, भैंवारी, गिरमिट, बिंधना, बसुला, रेतमल, तिकोरा, आरी, आरा।

हथियार – फरसा, तब्बल, बरछी, ढाल, तलवार, भाला, चक्कू, छूरी, उस्तरा, धनुस-बान, डण्डा, मुदगर, सोंटा (चाबूक / कोडा)।

शोधार्थी – राजेन्‍द्र कुमार काले, रायपुर. निदेशक – चित्‍तरंजन कर

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