शिवरात्री मनाबो – महादेव में पानी चढाबो

शंकर भगवान ल औघड़ दानी कहे गेहे। काबर पूजा पाठ करे के सबले सरल विधि एकरे हे। अऊ बहुत जल्दी खुस होके वरदान भी देथे। शंकर भगवान ल भोला कहिथे त सीरतोन में भोलेच भंडारी हरे। शिवरातरी के दिन एकर बिसेस पूजा पाठ करे जाथे। फागुन महीना में अंधियारी पांख के चौदस के दिन शिवरात्री ल मनाय जाथे। कहे जाथे की इही दिन शिव जी ह तांडव करके अपन तीसरा आंखी ल खोले रिहिसे अऊ पूरा ब्रमहांड ल समाप्त कर दे रिहिसे। एकरे पाय ए दिन ल महाशिवरात्री या कालरात्री भी कहे जाथे। कोई कोई काहनी में माने जाथे के भगवान शंकर के बिहाव ह इही दिन होइस हे।
शंकर भगवान के रुप ह निराला रहिथे। अपन हाथ गोड़ में राख ल पाऊडर बरोबर चुपरे रहिथे। गला में नाग सांप के माला, कान में बिच्छी के कुंडल, कनिहा में बघवा के छाला अऊ नंदी बैला के सवारी रहिथे। शिव जी ह अपन भक्त मन उपर जल्दी खुस हो जथे अऊ तुरते वरदान देथे।

पौरानिक कथा – एक बार एक शिकारी ह शिकार करे बर जंगल में जाथे। शिकार करत करत वोला रात हो जथे अऊ रसता भटक जाथे। त वोहा अराम करे बर एक ठन बेल के पेड़ में चढ़ जथे। वो शिकारी ह रात भर जागत जागत बेल पत्ता ल टोर टोर के खाल्हे में फेंकत जाय। पेड़ के खाल्हे में एक ठन शिवलिंग रखाय रिहिसे। बेल के पत्ता ह उही शिवलिंग में गिरत रिहिसे। वो दिन शिवरात्री रिहिसे। एकर से शिव जी ह भारी खुस होगे अऊ शिकारी के कलियान बर वरदान दीस।
एक अऊ कथा में आथे की एक मंदिर में सोना के घंटी बंधाय रहिथे। रात में एक झन चोर ह चोरी करे बर जाथे। वो घंटी ल निकालना चाहथे लेकिन ओकर हाथ ह घंटी तक अमरात नइ राहे। तब वोहा शिवलिंग के उपर चढ़गे अऊ घंटी ल निकाले लागीस। शिवलिंग उपर चढ़ीस त शंकर भगवान परगट होगे अऊ वरदान मांगे बर बोलीस। तब वो चोर डररा जथे अऊ बोलथे के मेंहा तो तोर पूजा पाठ कुछु नइ करे हों भगवान, अऊ मोर ऊपर कइसे खुस होगेस। तब भगवान बोलथे के सब आदमी आथे अऊ मोर ऊपर फूल पान नरियर भर चढ़हाथे , लेकिन तेंहा तो अपन पूरा शरीर ल चढ़हा देस। एकर से मेंहा खुस हों। अइसे बोल के वोहा चोर ल वरदान दीस अऊ चोर के गरीबी दूर होगे।
ए परकार से शंकर भगवान ह जल्दी खुस होके वरदान देवइया हरे। शिवरातरी के दिन जेहा भी सच्चे मन से पूजा पाठ करथे ओकर मनोकामना जरुर पूरा होथे।

ॐ नम: शिवाय ।

महेन्द्र देवांगन “माटी”
गोपीबंद पारा पंडरिया
जिला – कबीरधाम (छ. ग)
पिन- 491559
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