सुकलाल प्रसाद पाण्डेय के छत्‍तीसगढ़ी वर्णमाला गीत





वर्णमाला के स्वर

अ के अमली खूबिच फरगे।
आ के आंखी देखत जरगे।
इ इमान ल मांगिस मंगनी।
ई ईहू हर लाइस डंगनी।
उ उधो ह दौड बलाइस।
ऊ ऊघरू ल घला बलाइस।
ऋ ऋ के ऋषि हर लागिस टोरे।
सब झन लागिन अमली झोरे॥
ए ए हर एक लिहिस तलवार।
ऎ ऎ हर लाठी लिंहिस निकार ॥
ओ ओहर ओरन ल ललकारिस।
औ औहर बोला कोहा मारिस॥
अं अं के अंग हर टूटगे|
अ: अ: ह अअ: कहत पहागे।





वर्णमाला के व्‍यंजन

क क के कका कमलपुर जाही।
ख ख खरिया ले दूध मंगाही।
ग गनपत हर खोवा अँउटाही।
घ घर घर घर ओला बंटवाही।
ड ड पढ़ गपल हम खोबोन।
तब दूसर आन गीत ला गाबोन।
च चतरू हर गहना पहिरिस।
छ छबिलाल अछातेन बरजिस।
ज जनकू हर सुन्ना पाइस।
झ झट झट ओला मारिच डारिस।
झन गहना पहिरौ जी गिंया
ञ ञपढ़ ञ पढ़ पढञ।
ट टेटकू ह आवत रहिस।
ठ ठकुरी हर घला रहिस।
ड डियल बावा हर आईस।
ढ ढकेल खंझरी बनाईस।
ण ण ण कहिके डेरवाइस।
बम बम बम कहत फरइस।
त त तरकारी भात बनायेन।
थ थ थरकुलिया दार मंगायेंन।
द द देवी ला घला चघायेन।
ध धनऊ संग सब झन खायेव।
न न नदिया के पानी पीबोन।
अब हम आन गीत गाबोन।

सुकलाल प्रसाद पाण्डेय
वर्णमाला संबंधी गीत
रचनाकाल – 1906
बाल पहेली म संकलित



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