लोक कथा चन्दन के पेड़

Birendra Saral

एक राज में एक राजा राज करय। राजा के आधा उमर होगे रहय फेर एको झन सन्तान नइ रहय। संतान के बिना राजा-रानी मन ला अपन जिनगी बिरथा लागय। रात-दिन के संसो-फिकर में उखर चेहरा कुम्हलागे रहय। एक दिन राजमहल में एक झन साधू अइस। राजमहल ला निचट सुन्ना देखके अउ रानी के चेहरा देख के ओहा रानी के दुख ला जान डारिस। साधु ह रानी ला किहिस-‘‘बेटी! तैहा जादा संसो झन कर। तोर भाग में संतान सुख लिखाय हावे। मैहा तोला एक ठउर के पता बतावत हवं, उहाँ आमा के पेड़ हावे, आमा में मनमाने फल लगे हावे। तैहा राजा के संग उहाँ जाबे अउ फल गिरा के खाबे। हाँ, फेर फल गिराय के बेर एक बात के धियान रखबे। पेड़ में तोला एकेच ढेला मारना हे। एक ढेला में फल गिरही तउने ला खाना हे। कोन्हों एक ढेला में फल नइ गिरही तब दूसरा ढेला नइ मारना हे बल्कि उहाँ ले लहुट के आ जाना हे, समझगेस?‘‘साधू ह घनघोर जंगल के बीच ओ ठउर के पता बता दिस अउ अपन दान-दक्सिणा ले के राजमहल ले निकल गे।
रतिहा जब राजा ह अपन राजदरबार ले अइस तब रानी ह साधु के कहे बात ला राजा ला बता दिस। राजा घला साधु के बताय ठउर में जाय बर तियार होगे। बिहान दिन राजा ह राज-पंडित ले सुभ मुहरूत निकलवा के जंगल जाय के दिन-तिथि बांध डारिस अउ उही तिथि में सबो किसिम के तियारी करके अपन रथ में सवार हो के साधु के बताय जंगल डहर जाय बर निकलगे।
धीरे-धीरे राजा-रानी मन एक अइसे बियाबान जंगल में पहुँचगे जिहाँ चिरई चिंव करे न कंउआ कांव। राजा-रानी मन देखिन सिरतोन में साधु के बताय ठउर में एक आमा के पेड़ रहय । फेर पेड़ में एको ठन फल नइ लगे रहय। पहिली तो राजा-रानी मन, मन में सोचिन यहू साधु ह दूसर साधु मन बरोबर हमन ला ठग डारिस। उहाँ ले लहुटे के पहिली राजा ह एक बेर फेर ओ पेड़ ला चारो कोती किंजर के धियान लगा के देखिस ,तब पेड़ के फुनगी में ओला लटपट एक ठन फल दिखगे। राजा-रानी मन ला खुसी होइस। रानी ह फल ऊपर निसाना साध के एक ढेला मारिस, एकेच बेर में फल ह पेड़ ले टूट के भुंइया में गिरगे। रानी ह फल ला उठा के अपन अछरा में गठियावत रिहिस तभे ओ मेंरन एक राक्सस परगट होगे। राक्सस ला देख के राजा-रानी मन डर्रागे।
राक्सस किहिस-‘‘मैंहा ये पेड़ के रखवार अवं। मोर ले पूछे बिना तुमन इहाँ ले फल गिराने वाला होथव कोन? राजा-रानी मन डर्रावत-डर्रावत साधु के कहे बात ला बता दिन। राक्सस किहिस-‘‘तब तो ठीक हे फेर मोर एक सर्त हे, ये फल ला खाय के बाद तुहंर घर संतान के रूप में कोन्हों बेटा होही तब ओला मोर संग मितान बधवाहू अउ कोन्हो बेटी होही तब ओखर बिहाव मोर संग करके मोला अपन दमाद बनाहू। मोर सर्त मंजूर हे तभे ये फल ला लेगव नही ते येला इंहचे छोड़ के लहुट जावव।‘‘
राजा-रानी मन एक-दूसर ला देख के मनेमन सुन्ता होइन कि जब के बात तब देखे जाही। अभी तो हमला संतान सुख चाही। ओमन राक्सस के सर्त माने बर तियार होगे अउ फल ला धरके अपन रथ में सवार होइन अउ अपन राजमहल डहर बढ़गे।
रानी ह अपन महल में पहुँच के साधु के बताय विधि-विधान ले ओ फल ला खइस अउ सिरतोन में साधु के बताय बात सही होगे। नव महीना के बाद रानी ह एक सुघ्घर कन्या ला जनम देइस। राजमहल अउ राज भर में खुसी छागे। बधई के बाजा बजे लगिस। राजा-रानी मन के हिरदे संतान सुख पाके गदगद होगे।
धीरे-धीरे समय निकलत गिस अब राजकुमारी ह बने बिहाव के लइक सज्ञान होगे। एक दिन रानी रतिहा के बेरा अपन महल में सुते रहय। तभे उहाँ उही पेड़ वाला राक्सस परगट होगे अउ अपन सर्त के सुरता करवइस। रानी के जी धुकधुकाय बर लगिस। काबर कि वोहा अपन बेटी ल अपन जीव ले जादा परेम करे। अब तो राक्सस ह रोज परगट होके रानी ला अपन सर्त माने बर गजब हलाकान करे बर धर लिस। राक्सस ह रानी ला धमकावय घला, तुमन कोन्हो मोर बात ला नइ मानहू तब मेहा तोर राजकुमारी ला मार डारहूं। धमकी के मारे रानी के जीव बिट्टागे। वोहा एक दिन ये बात ला अपन राजा ला बताइस। राजा घला सोच में पड़गे ओमन अपन मन में राक्सस के चंगुल ले छूटे के अड़बड़ विचार करय फेर कहीं उपाय सुझबे नइ करय।
आखिर में राजा-रानी सुन्ता होइन कि कहूँ राक्सस ह रिसा के हमर बेटी ला मार डारही तब तो हमन फेर बिना संतान के हो जबो अउ राक्सस के संग बेटी के बिहाव कर देबो तब कम-से-कम बेटी ला जियत-खावत देखबो तउने में मन म संतोस रही। राजी-रानी मन दुनो झन राक्सस संग अपन बेटी के बिहाव करे बर तियार होगे। रतिहा रानी के सुते के बेरा जब राक्सस ह फेर परगट होके अपन सर्त ला दोहरइस तब रानी ह अपन मन के बात ला बता दिस।
मौका देख के राक्सस ह राजकुमार के भेस धरके राजकुमारी संग बिहाव के परस्ताव लेके राजमहल में पहुँचगे। राक्सस के रहस्य ला बस राजा-रानी भर जाने बाकी सब झन ओला कोन्हो राजकुमार समझे। राजा-रानी मन धमधाम से अपन बेटी के बिहाव ला ओ राक्सस संग कर दिन।
राक्सस राजकुमार ह अपन रथ में बइठार के राजकुमारी ला घनघोर जंगल के अपन महल में लेगे। राक्सस ह राजकुमारी ला अपन महल के कोन्टा-कोन्टा में घुमा के एक-एक ठउर के रहस्य ला बता दिस। एक दिन के बात आय राक्सस ह सिकार करे जंगल कोती निकलगे। राजकुमारी ह महल ला अकेल्ला किंजरत रहय। एक कुरिया में ओखर नजर पड़गे जेखर कपाट में तारा लगे रहय। तारा ला तोड़ के राजकुमारी उही कुरिया में खुसर के देखिस। उहाँ मरहा मनखे के कटाय मुड़ के माला गूँथा के टंगाय रहय। सब मुड़ ह राजकुमारी ला देख के खलाखला के हांसे लगिन। राजकुमारी डर्रागे। मुड़ मन किहिन-‘‘बहिनी! तैहा डर्रा झन जीव बचाना हे तब इहाँ ले भाग जा। जेखर संग तोर बिहाव होय हावे ओहा कोई राजकुमार नोहे, ये राक्सस आय। हमु मन ला अइसन ठग के ये बिहा के इहाँ लाने रिहिस अउ हमन ला मार के खा डारे हावे। उंखर बात सुनके राजकुमारी उहाँ ले भाग गे अउ जंगल में बहुत दूरिहा निकल गे।
रतिहा जब राक्सस ह अपन महल में पहुँचिस। तब राजकुमारी ला नइ देख के ओहा सब बात ला समझगे। ओहा अपन मायावी विद्या ले पता लगा डारिस कि राजकुमारी ह कोन दिसा में भागे हावे। ओहा तुरते ओखर पीछा करिस।
राजकुमारी घला भागत-भागत थकगे रहय। आधा डर आधा बल करके घेरी-बेरी पाछू लहुट-लहुट के देखे अउ भागे। अभी लहुट के देखिस तब ओला राक्सस ह दिखगे वोहा जी-पराण दे के भागिस अउ नदिया खड़ के एक जब्बर चंदन पेड़ में चढ़गे अउ ओखर खोलका में खुसर के चुप्पे मिटका के बइठ गे। चंदन के पेड़ ह देवतहा रहय। तिही पाय के राक्सस के माया ह ओ मेरन काम नइ करिस। राक्सस गजब उदिम करिस फेर राजकुमारी के पता नइ पाइस तब थक-हार के उहाँ ले लहुट गे।
राक्सस ह लहुट के चल दिस तब राजकुमारी के जीव हाय लागिस। राजकुमारी ह अपन जीव ला बचाय बर भगवान ला घेरी-बेरी सुमरे लगिस। थकासी के मारे ओखर नींद घला पड़गे। भगचान ह ओखर गोहार ला सुनिस। वो रतिहा भारी पानी गिरिस। नदिया में बाढ़ आगे। बाढ़ के पानी में चंदन के पेड़ ह उखड़गे अउ नदिया के पानी में बोहावत बहुत दूरिहा दूसरा राज मे पहँुचगे। बिहनिया जब राजकुमारी के नींद उमचिंस। नदिया के बीचो-बीच चंदन के पेड़ के संग अपन आप ला बोहावत अउ चारो कोती पानीच पानी देखके राजकुमारी के जीव सुखागे, वोहा फेर भगवान ला जीव बचाय बर गोहराय लगिस। भगवान ओखर गोहार ला सुन लिस अउ एक उपाय करिस।
उहीच बेरा में कोन्हों राज के चार झन राजकुमार मन वो नदिया में डफोर-डफोर के नहावत रहय। बाढ़ के पानी में चंदन के जब्बर पेड़ ला बोहावत देख के ओमन अचरज में पड़गे। ओमन अपन राज करमचारी जउन मन उखर सुरक्सा बर नदी के खड़ में खड़े रहय तउन मन ला चदंन पेड़ ला पकड़ के बाहिर निकाले के आदेस करिन। सब झन मिलके पेड़ ला निकालिन। डारा-साखा ला तो उही मेरन काट के अलग कर दिन अउ सब ला जोर के राजमहल में ले आनिन।
राजकुमारी अभी घला पेड़ के भीतरीच में खुसरे रहय। रतिहा सुनसान होवय तब ओहा खोलका ले निकले अउ राजमहल के रसोई में जाके बांचे-खुंचे भोजन ला करय अउ फेर चुप्पे आके उही खोलखा में खुसर जाय। एक किसम के इही खोलखा ह ओखर बर घर बनगे रिहिस। अइसने-अइसने बहुत दिन बीतगे।
एक दिन चारो झन राजकुमार मन चंदन के ओ लकड़ी ला देखत रहय। छोटे राजकुमार किहिस‘‘-भैया अब ये चंदन के लकड़ी ह सूखागे हावे। मोला चंदन लकड़ी के खड़ऊ पहिरे के सउख लागथे। बढ़ई ला बलवाके येला कटवा देववं का?‘‘ बड़े राजकुमार अपन सहमति दे दिस। तुरते राज बढ़़ई ला बलाय गिस। बढ़ई अपन आरा में लकड़ी ला काटे लगिस। फेर लकड़ी के भीतरी ले कोन्हो नारी पराणी के अवाज सुनाइस जउन ह कहत रहय, ‘‘धीरे-धीरे काटहू हो बढ़ई बबा! मोर हाथ-गोड़ ला बचा के। येला सुनके ओ मेर जतेक मनखे खड़े रिहिन सब के सब डर्रागे। बढ़ई ह काटे बर छोड़ के भागगे। अब राजा ह आरी ला पकड़िस तब फेर अवाज अइस, ‘‘धीरे-धीरे काटहू ससुर जी मोर गोड़-हाथ ला बचाके। अइसने-अइसने जतेक झन आरी धर के काटे बर धरिन तब नŸाा-गोŸाा के हिसाब ले अवाज आवय। आखिर में छोटे राजकुमार जउन कुंवारा रहय तउन ह आरी ला धरके लकड़ी ला काटे बर धरिस। फेर उही अवाज अइस , धीरे-धीरे काटहू हो मोर स्वामी नाथ, मोर गोड़ हाथ ला बचाइके। छोटे राजकुमार ह हिम्मत करके धीरे-धीरे कोरे-कोर ला काटे के सुरू करिस। लकड़ी ह दू भाग में कटागे अउ भीतरी ले राजकुमारी ह निकल के अपन मुड़ नवा के खड़े होगे। ओला देख के सब झन दंग रहिगे। तुरते राज भर में ये समाचार ह बगरगे। राज भर के मनखे राजमहल में सकलाय लगिन।
राजा ह पूछिस, तब राजकुमारी ह अपन राम कहानी ला सबके आधू में सफा-सफा बता दिस। येला सुनके के बाद सब झन आपस में विचार-विमर्स करिन अउ छोटे राजकुमार ले सहमति ले के धूमधाम से उखर बिहाव कर दिन। अब बने सुख में दिन बीते लगिस।
बहुत समय बीते के बाद राजकुमारी के दूसरइया बिहाव के समाचार ह वो राक्सस तक पहँुचगे। एक दिन वोहा मनिहारी के भेस बनाके राजमहल तीर धमक दिस। राजकुमारी मनिहारी समान बिसाय बर तीर में पहुँचिस। तब ओला चिन्ह डारिस। राक्सस ह ओला धमका के कहिस- ‘‘अब तो जिनगी जादा नइ बांचे हे जतना मजा करना हे दू-चार दिन अउ करले। तैहा मोर नइ हो सके तब कोन्हो दूसर के घला नइ हो सकस। मैहा तोला चार दिन के बाद आके मार डारहूँ।‘‘ राजकुमारी डर्रा के तुरते भागिस अउ महल में खुसरगे।
रतिहा राजा-रानी अउ राजकुमार मन सकलइन तब सबला राक्सस के धमकी ला बता दिस। बिहान दिन राजा ह अपन राज के जदुवन्ता वइद ला बलवाके राक्सस ला मारे के उपाय पूछिस। वइद ह बने सोच-विचार के बताइस कि जंगल के जउन पेड़ के फल ला खाके राजकुमारी के महतारी ह गरभवती होय रिहिस। ओ पेड़ में एक घुघवा रहिथे। राक्सस के जीव ह उही घुघवा के जीव में समाय हावे। कोन्हों जाके ओ घुघवा ला मारही तभेच राक्सस के पराण छुटही।
आखिर में सब झन बइठ के सुन्ता होइन कि येती राक्सस ह राजकुमारी ला मारे बर राजमहल में आही उही बेरा में राजा के सैनिक मन जाके ओ पेड़ के घुघवा ला मारही। अब राक्सस ला मारे बर सब किसिम के तियारी करे गिस। अपन बताय बेरा में राक्सस ह राजकुमारी ला मारे बर राजमहल में पहुँचगे। फेर ओती उही बेरा में राजा के सैनिक मन घला जंगल के पेड़ के ओ घुघवा ला मारे बर पहुँच गे रिहिन। सैनिक मन जइसने घुघवा ला मारिन वइसने येती राजमहल में खुसरे राक्सस के जीव छूटगे ओहा पटिया के गिरगे।
राक्सस के मरे के बाद ओखर लास ला नदिया के तीर में ले जाके जला दे गिस। राजकुमारी ला ओ राक्सस ले मुक्ति मिलगे। अब सब झन बने खइन-कमइन राज करिन। मोर कहिनी पुरगे ,दार भात चुरगे।

-वीरेन्द्र सरल
बोडरा(मगरलोड़)

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