पतंजलि के योग दर्शन, बाल्मिकी मूल रामायण, ईशावास्योपनिषद : अनुवाद

छत्तीसगढी कवित्त मं मुनि पतंजलि के योग दर्शन अउ समझईस

बाल्मिकी मूल रामायण

रचयिता
डॉ हर्षवर्धन तिवारी पूर्व कुलपति

प्रकाशक
श्री राम-सत्य लोकहित ट्रस्ट
ज्ञान परिसर पो.आ. रविशंकर विश्वविद्यालय
रायपुर ( छ.ग.), मो. 09977304050




अनुक्रमणिका

भाग-एक छत्तीसगढी कवित्त मं मुनि पतंजलि के योग दर्शन अउ समझईस 7-84
भाग-दो बाल्मिकी मूल रामायण 85-104
भाग-तीन ईशावास्योपनिषद 105-110
त्याग का अध्यात्म ।
जगत गुरू स्वामी विवेकानन्द का आध्यात्मिक खोज तथा मानवता और विश्व धर्म 115–126
परिशिष्ट
श्री राम सत्य लोकहित ट्रस्ट की कार्य शृंखला 1996-2014

पतंजलि के योगसूत्र ह आध्यात्म साधना के मंत्र ये
प्रथम अध्याय
चिंतन

योगसूत्र ह, पंतजलि मुनि बर सोच विचार के अभ्यास करे के विचार ह हमर हिन्दु धरम या के बाद, रचेगे रहिस। भगवान वैदिक दर्शन छठों दर्शन मन म शिव ल शिवसंहिता मा योग के एक दर्शन विचार ये । जैसे भागवत् नींव माने, गे हे। फेर गीता ह अउ घेरण्ड संहिता ह घेरण्ड संहिता मा आसन, मुद्रा, योगिक इतिहास मं मील के पथरा प्राणायाम, ध्यान अउ चेतना ल ये, वैसने योग सूत्र ह, हमर मन लांधे के मार्ग बताय गे हे । फेर ल आध्यात्म चिंतन मं बांधे बर, हठयोग प्रदिपिका ह बहुत बाद सुरता करे बर, सोंचे बिचारे बर में योग के पहली सीढी बनाय मंत्र मा ये। योग के दर्शन के बर आसन प्राणायाम, मुद्राबंध अउ अभ्यास पालन करे बर आजो वो तीनों योग के योग करे बर, ह जब ले पंतजलि मुनि, बनाये पहली शरीर ल साधे बर माने बिचारे रहिन, ओतके आजो सोचे गिस । कहिथे न, ‘शरीर माध्यम बिचारे अठ करे के लाइक हे। खलु धर्म साधनम्” पंतजलि महाराज के पंतजलि मुनि के योग सूत्र योगसूत्र ह दू शबद से बने हे ह योग के जब्बर कठिन समझे संस्कृत के योग अउ सूत्र ले। के साधना अउ बिचार ये। चार योग ह हमर मन अ भाव ल औ अध्याय मं पहली सीढी बताथे के हमर सोचंई ल थामे बर ये। अउ योग कय किसिम के होथे? फेर सूत्र ह सूजी अउ धागा बरोबर दूसर सीढी मं ओला कइसे योग सही माला ल पिरोये रखे साधथें, बताये जाथे । फेर तिसर बर ये । जइसे माला के धागा मं सीढी मं योग के का सिद्धी हे, कण्ठी ल पिरो के राखथें । का शक्ति हे, बताये गे हे। अउ पंतजलि मुनि के योग आखिरी चौथा खण्ड मं हमला दर्शन पुराण के काल ले योग ल योग ह कहां उठा देथे, जड एक चिंतन, अभ्यास, अ जगत से चैतन्य मां फेर चैतन्य आध्यात्म के यात्रा म आगे बढे से चेतनातीत के अनुभूति, मन ले उठा के भावातीत अउ फेर आठ अंग मन हें –
पार्थिव जगत ले उपर उठाके आध्यात्म जगत के अनुभूति के हल पाये बर पतंजलि के योग सूत्र ह मार्ग दर्शक साधक ग्रंथ ये। निर्विकार भावातीत आध्यात्मिक अनुभूति बर ए हा अलगे रस्ता ये । योग सूत्र ह १६४ मंत्र-सूत्र मा हे । एक एक सूत्र ह एक एक सीढी ये । ये ह चार अध्याय मं चार पद मा हे । पहली समाधि पाद ह ५१ सूत्र मा दूसर साधन पाद ह ५९ सूत्र मा तीसर विभूति पाद ह ५४ सूत्र मा चौथा कैवल्य पाद ह ३५४ सूत्र मा हे। पंतजलि योग ल अस्टांग योग भी कथें। याने आठ अंग वाला योग । योग के अभ्यास बर पतंजलि मुनि ह साधन पद मा योगाभ्यास के आठ अंग ल बताय हे, ओमा से एक हे शरीर आसन के बारे मा हे । अष्टांग योग के आठ ठन अंग मन म हे-
1. यम-जेमा सत्य, अहिसा, अस्तेय, ब्रम्हचर्य अपरिग्रह आथे ।
2. नियम–जेमा शुद्धता, संतोष, तप, स्वाध्याय अउ ईश्वर समर्पण आथे ।
3. आसन-योग करेबर, योग के आसन ।
4. प्राणायाम–मा स्वांस, प्रश्वास ल करे के तरीका आय ।
5. प्रत्याहार–मं इंद्रिय संयमित कर के, मन ल संयमित करइ, बताये गे हे ।
6. धारणा-एकाग्रता प्राप्त करइ ये।
7 . ध्यान-मन ल बिचार रहित, निर्विकार करे के, अभ्यास ये।
8. समाधि-चैत्यन्यातीत अवस्था ल पाये के अभ्यास अउ स्थिति ये ।

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संघरा-मिंझरा

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