फुटहा छानी

गांव भर चरचा च ले लगिस. अब पंचाइती चुनाव म सरपंच महिला ल चुने जाही. कोन अपन माई लोगन ल चुनाव म उतारही, दिन – रात इही बात होय लगिस. कम पढ़े लिखे गांव म जइसे माईलोगन ल चूल्हा फुंकइया अउ कोरा म बंस बढ़हइया के संग कोरा म लइका खेलइया समझे जाथे ये गांव, उही गांव के श्रेणी म आये. गांव म बइसका होय अउ कोन चुनाव लड़ही ये गोठ आये अउ जाये पर निणर्य नई होय पाय . काबर के कोनो मरद बइठका म अपन घरवाली ल चुनाव म खड़े करे के बात नई करय . खिलावन बिन बलाय बइठका म आवय अउ मने मन कामना करय के ओ बेरा कभू मत आये जब कोनो गांव के मरद उठके के कहे कि ओकर माईलोगन चुनाव लड़ही. ओकर मंशा अपन माईलोगन ल चुनाव लड़ाय के रिहीस. पर बइठका म ऐकर सेती फुरिया नई सकय के ओला गांव म आये अभी जुम्मा – जुम्मा एक बरिस होय होही.दुसंधा म रहय कि गांव वाले मन ओकर बात ल मानिस के नई मानिस. इही उधेड़बुन म ओहर अपन बात नई रख पात रिहीस. ओहर चाहत रिहीस के गांव वाले मन खुद होके ओला कहाय . पर गांव वाले मन के कहना तो दूरिहा के ओकर डहर हिरक के नई देखय . देखतिन भी काबर ओहर बाहिर ले आये हे अउ गांव के जिम्मेदारी ओला संउपे के कइसे बिचार गांव वाले मन करतीन . पुराना सरपंच घलोक सुधवा. अपन सियानी के दिन म कभू दू पइसा के गबन नई करिस. गांव के बिकास म जतका हो सकीस करे के परयास करिस. एक दिन के बइठका म ओकर माई लोगन ल सरपंची चुनाव म खड़ा कराय के बात अइस पर पुराना सरपंच कहे लगिस – मोर बाई कम पढ़े लिखे हे. पंचाय त म लाखों रूपिया के काम आथे, मंय तो जइसे तइसे च ला लेत रहेवं फेर बाई कर पाही ऐमा मोला संदेह हे. अउ फेर आजकल जनपद के बाबू भइया म खांव – खांव करथे. एक – एक काम म कमीशन मांगथे. मंय तो लड़ झगर लेत रहेंव पर डौकी परानी का करही.
पुराना सरपंच के बात ल गांव वाले मन सुनके कहिन – तोर बाई नाव के सरपंच रही. काम बूता ल तंय करबे.
गांव वाले मन के सलाह घला पुराना सरपंच ल नई जमिस. पढ़े – लिखे सरपंच के बात आते ही खिलावन के मुंह म पानी आय लगिस. ओहर मने मन बिचारे लगिस के गांव वाले मन जानतेच हे के ओकर बाई पढ़े लिखे हे. ओ चाहे लगिस के कोनो उठे अउ ओकर बाई के नाव धरदे. पर ओकर डहर ले गांव के गांव बेखर रिहीन.
अब तो दिन अउ रात कोनो बेरा अइसन नई रिहीस जब माई लोगन के ये चुनाव म सरपंची चुनई के बात नई च लत रिहीस होही. जहां दू झन आदमी सकलाय बस एके च रचा कोन अपन माई लोगन ल चुनाव म खड़ा कराही ?
पीपर के पेड़ तरी बने च उंरा म बइठे हिरामन गोठयाय अउ बीच – बीच म सुकदेव हुंकारू भरय .अब गांव डउकी सियानी म च Jही . सरकार J घJा पता नई का – का होवत रहिथे. कते – कते कर ले निय म कानून लाथे अउ सउप देथे हमला भोगे बर. जब डउकी परानी गांव के सियानी करही त घर के च उका – चूल्हा कोन देखही. कोठा के गोबर कोन हेरही. गोबर के छेना कोन थोपही ?
– आज समय बदल गे हे हिरामन, कब तक माइलोगन मन घर बइठे रहही ? सरकार जउन करथे, सोच – समझ के करथे जी ।
– तोर गोठ ल मंय मानव हंव पर जब माइलोगन गांव के सियानी करही, तब घर परिवार कते डहर जाही ?
– तंय शहर के माइलोगन मन ल देखेच हस हिरामन । ओमन नउकरी – चाकरी करथे अउ अपन घर परिवार ल घला सकेलथे ।
– तंय सिरतोन कहत हस संगवारी, मोर मति मारे गे रिहीस …।
हिरामन अउ सुकदेव के जोड़ी ल का कहिबे. नानपन म दूनों जउन संगवारी बनीन ओला अब तक निबाहत हे. दुनों के जोड़ी ल टोरे के जलनखोरहा मन कई उपाय करिन. परपंच रचि न पर उंकर जोड़ी नई टुटिस. अब तो उमर साठ ले पार करले हे अउ नानपन ले एको दिन अइसन नइ गिस होही जब दूनों संगी अलग होय होही. कोनो गांव जाना रहय त दूनों संगे जाय . चाहे सुकदेव के सगा घर बर बिहाव, मरनी – हरनी के काम कारज राहय या फेर हिरामन के सगा घर. जवानी के दिन म जतका उतलंई ओमन करिन होही ओतका कोनो अउ करे होही अइसन सुने ल गांव म नई मिलिस. चाहे तरिया म डूबक – डूबक के नाहय के होय या फेर भैरी के बारी ले बिही – खिरा चोरय के होय .
अभी उंकर मन के बाताचीता च लत रहिस के साय कल मनरोतम आवत दिखिस. नरोतम सुकलिया के गोसइया ये. नरोतम चार कक्ष्ाा पढ़े के बाद पढ़ई ल छोड़ नांगर – बख्खर के काम काज म जोतागे. ओकर बाई सुकलिया दसवीं कक्ष्ाा तक पढ़े रहय . पर कभू अइसन नई लगिस के सुकलिया ल अपन पढ़े लिखे के गरब गुमान होही. बड़े ल बड़े अउ छोटे ल छोटे माने म कभू अनाकानी नई करिस. अइसन बेरा घला कभू नई आइस जब ओकर संग कोनों माई लोगन के लड़ई – झगरा होय होही. दसवीं पढ़े के बाद भी ओहर गांव के रंग म रच बसगे. नरोतम उंकर कर अइस. साय कल ल ठाड़ कर कहिस – का गुनतारा च लत हे दुनों संगवारी म ?
– अरे नरोतम, तंय कहां ले आवत हस बाबू , आ बइठ. हिरामन कहिस.
– नहीं बबा, मोला बड़ बेर होगे घर ले निकले . गाय गरू ल पेरा भूंसा दे के बेरा होगे हे. फेर कभू बइठबो.
– हव रे भई, हमन तो होगेन ठेलहा, तंय कमइया. काबर समे खराब करबे हमर मन तीर.
– अइसन बात नोहे बबा,
– त अउ कइसन बात हे ? हिरामन तिखारिस.
– तहूं अतका ल नई जानस हिरामन. बड़ बेर घर ले निकले हे बिचारा. काम धाम नई करही त बहू ठठाही नहीं. अउ दुनों संगी हंसे लगिन. नरोतम – तहूं न बबा कहत साइकल के पइडिल ल ओंट आगू डहर बढ़गे.
हिरामन अउ सुकदेव के बात फेर च ले लगिस.
दिन सरकते गिस अउ चुनाव बर परचा भरे के दिन लठियाते गिस. गाँव म फेर बइठका होइस. कोनो अपन माइलोगन ल चुनाव म उतारे बर तियार नई होइस. खिलावन समे के ताक म रहिस. कोतवाल समे कहिथे – हमर मेर जादा दिन नई हे. कोनो न कोनो ल परचा भरवाये के निरनय ले ल परही. नई ते हमर गाँव म सरपंच चुनई म देरी के साथ बिकास काम म घलो देरी होही.
कोतवाल के बात सिरतोन रिहीस. बिन सियान के भला गाँव के समस्या सरकार तक कइसे पहुंच तिस अउ कइसे समस्या के निदान होतिस. पर इहां तो बिकट समस्या उपस्थित रहिस. कोनो ये कहे बर तियार नई रिहीस के मोर बाई हर चुनाव म उतरही. अभी गांव म बइठका च लते रहिस के गांव के समारू अउ जीवन अइन . ये दुनों के दिन कटे खिलावन के घर. इंकर माईलोगन मन पर के खेती म बनी भूती करे अउ बाल ब‚ा के साथ अपने गोसइयां के पेट घलोक पोसे. एक – एक चेपटी म अतका ताकत रिहीस के दुनों के दुनों खिलावन के परम भI बनगे रिहीन. खिलावन इही दुनों ल अपन पक्ष्ा म बोले बर तियार करे रिहीस. अउ आज बइठका म आ के ये दुनों अपन बात ल बकर डरिन. कहिन – हमर गांव म कोनो तियार नई होवत हे अपन बाई ल सरपंची चुनाव म उतारे बर ता काबर खिलावन के माइलोगन ल नई उतार देव चुनाव म.
गांव भर के जुरायाये लोगन ल समझ आत देरी नई लगिस कि ये खिलावन के दारू बोलत हे. हिरामन तिलमिलागे. कहिस – खिलावन ल अभी जुम्मा – जुम्मा चार महीना होय हवे गांव म बसे अउ तुमन ऐकर माईलोगन ल गांव के सियानी सौंपे के गोठ गोठियाथो. ये गोठियाये के पहिली सोचो समझो काबर नई.
– तोर कहिना ठीक ये बबा, पर तहीं बता जब कोनो गांव के माईलोगन तियार नई हे चुनाव लड़े बर तब अउ का हमर मेर रद्दा हे. तहीं फुरिया, कोन अपन माई लोगन ल चुनाव म उतारे बर तियार हे ?
हिरामन चुप होगे. नाव ले त ले आखिर काकर. कोनो तो मुंह फुटकार के कहत नई हे के मोर माईलोगन चुनाव म उतरही. गांव के सियानी करही. हिरामन कहिस – पराया ल सियानी सौपे के बजाय हम चाहत हन हमरे सियानी करे.
– पर कोन हे तेन ल तो बता बबा ?
– तुमन पर ल गांव के सियानी सौपे के जघा म अपन माईलोगन ल सियानी सौपे के काबर नई सोंच व ?
– पर हमर बाई तो पढ़े लिखे नई हे, सरपंची बिना पढ़े लिखे करही ता गांव के का होही, तहूं जानथस अउ महूं.
बात सिरतोन रिहीस. जउन जतका जादा पढ़े लिखे रहिथे. ओहर ओतके अच्छा अधिकारी – मन संग बात करे ल जानथे अउ गांव के समस्या ल रखके ओकर निदान के उपाय सुझाथे. पर इहां दुनों दरूवाहा के माईलोगन मन तो एक कक्ष्ाा नई पढ़े रिहीस. इंकरो मुड़ मं गांव के सियानी देना मने अपन गांव के बिकास ल रोकना ये. दुनों दरूवाहा के बात ल सुनके खिलावन मंद – मंद मुसकाये लगिस पर हिरामन के अड़गा म ओला गुस्सा घलोक आये लगिस. पर करतीस ता करतीस का. एक डहर पूरा गांव रिहीस एक डहर खिलावन अउ ओकर दु पोसवा दरूवाहा. तीन झन से काम बनने वाला नई रिहीस. खिलावन तो च हत रिहीस – कम से कम आधा गांव ओकर पक्ष्ा म आ जाये फेर आधा ल बात माननेच ल परही. पर इहां आधा गांव तो दूरिहा के रिहीस. दू के सिवा तीसरा ओकर पक्ष्ा म नई रहिस. वइसे जब ले पचार् भरे अउ चुनाव होय के च चार् गांव म होय लगिस तब ले खिलावन सक्रिय होगे रहिस अउ गांव के अइसन कोनो आदमी नई होही जेन ल अपन जाल म फांसे के परयास नई करिस होही पर गांव वाले मन ओकर दारू तो पीगे पर ये दूनों दरूवाह के बाद तीसरा कोनो ओकर जाल म नई फसीस. गांव म जतका बेर बइठका होइस, कोनो ओकर पक्ष्ा नई लिस. अब तो निरनय के घड़ी तिरयागे रिहीस. अपन बात ल अपन मुंह न रखके दूनों दरूवाहा के द्वारा रखना उचि त समझ ओहर तीन दिन ले ओमन ल अतका पीयात हे के गांव में बिरोध के बावजूद ओमन अपनेच बात में अड़े रहय संगे संग गांव वाले मन ल भी अपन बात माने बर तियार करले. खिलावन जतका आसान बात बने के सोच त रहिस ओतका आसान नई होत रहिस. घुम फिर के बात घेरीबेरी अपनेच गांव के माईलोगन ल चुनाव म उतारे के आ जाय .
अभी गुनताड़ा च लत रिहीस. उही बेरा नरोत्तम अइस. नरोत्तम ल देखके हिरामन के आंखी च मकगे. नरोत्तम ल अपन तीर म बलइस. कहिस – नरोत्तम, तोर माइलोगन पढ़े – लिखे हवे. तंय अपन माईलोगन ल सरपंच चुनाव के फारम भरवा दे.
– मंय गरीब आदमी बबा, दूनों परानी मेहनत – मजदूरी करके घर – परिवार ल च लाथन. फेर गांव के सियानी कइसे अपन मुड़ म लेबो. घर के छानी फूटहा हे. पानी टपकथे. अपनेच छानी ल टपराये के मोर ताकत नई हे तब कइसे गांव भर के छानी ल टपरा सकत हंव.
– तोला अपन फुटहा छानी के चिंता हे ? इहां गांव भर के साबुत छानी घलोक निथरे लगही, ऐकर चिंता फिकर नई हे ?
– अइसे कइसे होही बबा, भला साबुत छानी कइसे निथरे लगही ?
समारू गुमशुम बइठे कुछ सोचे लगिस । ओकर दारू के निशा उतरे लगिस । फेर डगमगावत उठीस अउ कहे लगीस – हिरामन बबा सिरतोन कहत हे नरोत्तम …।
समारू के बात ल सुनके खिलावन के संगे संग गांव वाले मन घलो अकबकागे. समारू अपना कहना जारी रखिस – तोर घर के छानी ले पानी टपकथे ता का होगे. गांव घर के सरपंच बनही त छानी छवा जाही अउ पानी के टपकना घला रूक जाही पर पराया के हाथ सियानी जाय म साबूत छानी ले पानी टपकना शुरू हो जाही ….। समारू जीवन ल देखके कहिस – कइसे जीवन, का मंय गलत कहत हंव ।
– बिलकुल गलत नई कहत हस संगवारी …। जीवन हर समारू के साथ देय लगीस. उंकर बात ल सुनके खिलावन के गुस्सा भड़के लगीस. पर करे त करे का ? गांव के जुरयाये लोगन के बीच फुटकार के ये थोरे कहय कि मंय तुम्मन ल तीन दिन ल दारू अइसने कहे बर पीयाय हंव रे. ओकरे फजीहत होतिस. मन मारके बइठे रहिस …।
– गांव के सियानी गांव च के हा कर ही तभे गांव म बिकास होही. दारू पीयाके जउन सियानी चाही, वो अपन बिकास ल सोच ही… कइसे समारू ? जीवन किहीस.
– सिरतोन कहत हस संगवारी …। समारू हुंकारू भरिस.
खिलावन दू ठन आदमी पोसे रहिस, उही मन ओकर बिरोध म होगे. अब खिलावन ल लगे लगिस – ओकर पोलपuी खुले के बेरा आगे. ओहर बइठा ले सलटे के जुगत म रहीस. समारू ओकर कर अइस. कहिस – कइसे खिलावन, तंय हमर बिचार ले सहमत हस नहीं ?
खिलावन का कहे. चुप रिहीस. जीवन किहिस – अरे समारू, खिलावन का कहही. ये हमर गांव के मामला ये. हम ये माटी म जनमे, ये माटी म खेले कूदे हन. नानपन ले हमर तन अउ मन म ये माटी समाय हे. पराया ल पूछे के काबर ? निरनय हम्मन ल लेना हे. नरोत्तम घर के भउजी सरपंच बनही, मतलब उहिच बनही…।
– कइसे नरोत्तम, अब तोला का कहिना हे ? हिरामन कहिस.
– अब मंय का कहव बबा, गांव वाले न जउन चाहही उही होही.
नरोत्तम के कथन म स्वीकृति रहिस. पहली थपड़ी जीवन पीटिस अउ फेर बइठका भर थपड़ी के आवाज म गूंजे लगिस. थपड़ी के आवाज खिलावन के कान के परदा चीरे लगीस. ओहर बइठका ठउर ले उठके अपन घर डहर च ल पड़िस, पर थपड़ी के गूंज ओकर कान के संग नई छोड़िस….।

छत्तीसगढ़ी कहानी
छन्नू अउ मन्नू
सुरेश सर्वेद
राजनांदगांव छ.ग.
श्रीकांत ल नवा बइला लेना रिहिस। ओहर आमगांव के बजार गिस। उहां बइला बजार म श्रीकांत बइला मन ल देखन – परखन लगिस। ओला निमेष के दावन म बंधाये बइला जोड़ी भा गे।
बइला ब्यापारी निमेष बइला जोड़ी के कीमत बीस हजार बताइस। कहिस – ये मन ल लेके तो देख। अइसन बइला जोड़ी दीया धर के खोजे म नइ मिलही।
श्रीकांत, निमेष के बात मं हां ले हां मिलावत रिहिस फेर ओकर कीमत कम करवाये के फिराक म रिहिस हे। निमेष झट छन्नू नाम ेके बइला के पीठ ला ठोंकिस। ओकर पूंछी ल अइठिस। छन्नू ऊपर डहर उचक के अपन पहलवानी देखइस। निमेष छन्नू तीर मं बंधाय बइला ल छुइस त ओहर दुनों गोड़ म खड़ा होगे। निमेष किहिस – येकर नाम मन्नू हवय। छन्नू अउ मन्नू के पटथय घलो। अलग – अलग खूंटा म बांध दूहूं त दावन तोड़ देथे।
श्रीकांत के पारखी नजर बइला मन के ताकत ल भांप ले रिहिस। मोल भाव होइस अउ निमेष सोला हजार म दावन ठोंक दीस।
श्रीकांत रुपिया गिन बइला मन ल धर घर डहर चल परिस। छन्नू – मन्नू लकर – लकर रेंगे लगिन। बइला मन के रेंगई मं श्रीकांत नइ सक सकिस। श्रीकांत कांसरा ल बइला मन के सींग म फांस दीस।
रद्दा म भाटागांव परिस। एक ठिहा म कुछ गांव वाले म रहिस। ओमन बइला ल देखिस अउ श्रीकांत ल पूछिस- ये बइला कहां ले लावत हस। कतेक म ऐ मन ल बिसाय हस ?
– आमगांव के बाजार ले। पूरा सोला हजार लगगे।
– सस्ता म पागेस …।
– सस्ता कहां, सोला हजार इही कर परे नईहे। श्रीकांत हांसत किहिस।
– तैं फिकर झन कर। बइला मन तोला सोला के बत्तीस कमा के देही। गांव वाले मन भविष्यवाणी घलो कर दीन।
श्रीकांत ल गांव पहुंचे के जल्दी रिहिस। ओहर चाहत रिहिस के बेरा बुड़े के आगू गांव पहुंच जाय ताकि गांव वाले मन घलोक बइला ल देखै।
गांव के तीर पहुंचते सांठ श्रीकांत बइला मन के कांसरा ल सींग ले निकाल के धर लीस। गांव वाले मन बइला देखिन त देखतेच रहिगे। घर के मुहाटी म पहुंचते सांठ श्रीकांत के बाई सुनंदा लोटा भर पानी ले आइस। मुहाटी म ओरसा, आरती सजा ले अइस॥ बइला मन के आरती पूजा करिस। उंकर माथ म चांउर – गुलाल लगाइस। नरियर फुटिस। लोगन मन म परसाद बांटे गिस। श्रीकांत बइला मन ल अंगना मं ला के खूंटा मं बांध हरियर – हरियर कांदी उंकर आगू म डार दीस। बइला मन कांदी खाए लगिन।
बइला देखे बर बड़ अकन गांव वाले मन आये रिहिस। ओमे से कुछ ल खुशी होत रिहिस त कुछ ल जलन। गांव वाले मन नवा बइला ले के खुशी म श्रीकांत ल नेवता करवाये बर किहिस। श्रीकांत के कहिते सांठ सुनंदा भोजन रांधे बर भीडग़े।
अभी गांव वाले मन बइला देखत रिहिस के अमित अइस अउ कहिस – मनीष तैं इहां श्रीकांत के बइला देखत हस, ओ डहर तोर बइला गाड़ी नाला म अरहज गेहे।
– त दूसर के बइला मांग के काबर नइ ले आवस । मनीष किहिस।
– गांव भर के बइला ल फांद के देख डरेव, फेर गाड़ा टस के मस नइ होवस।
मनीष श्रीकांत ल किहिस – श्रीकांत, तैं अपन बइला मन ल दे दे। ओकर संभव घलोक हो जाही।
– नहीं रे भाई, ये मन अभी थके हावय, सुस्तान दे।
– त का ये मन ल देखाय बर लाये हस। मोला तो लगथे, ये मन गाड़ा ल नइ खींच पाही।
श्रीकांत जिद्द म उतरगे। श्रीकांत बइला मन ल ढील दीस। बइला मन ल नाला मेर लइस। गाड़ा म ठसाठस धान जोराय राहै। ओहर नाला के चढ़हान म अटकगे रिहिसे। बइला मन ल गाड़ा म फांदे गिस।
बइला मन एक दू पग चढ़ाये फेर पाछू खसक जाये। मनीष किहिस – श्रीकांत, तोर बइला मन के कारज दिखगे। अतकी अकन चढ़ाव ल पार नइ कर पावथे।
सुन के छन्नू – मन्नू के तेवर चढग़े। ओमन आगू के दूनों घुटना ल मोडिऩ। पीछू के खुर म बल दीन अउ फुर्ती के साथ आगू के गोड़ ल उठा के आगू चल परिन।
बइला मन हांफे लगिन। ऊंकर मुंहू ले झांग निकलगे। कइसनों करके ओमन गाड़ा ल ऊपर खींच लाइन। मनीष ल बइला मन के तारीफ करना रिहिसे। ओहर बइला मन के परीक्षा लेना चाहत रिहिस हे जेमा बइला मन सफल होगे।
श्रीकांत गांव वाले मन संग अपन घर अइस। जेवन बनगे रिहिस। पहली दू ठन थारी म निकाल के छन्नू अउ मन्नू ल दीस फेर गांव वाले मन डकार के लेत ले खइन।
श्रीकांत रोज बिहिनिया ले उठते बइला मन ल दाना पानी दे। ऊंकर आगू म हरियर – हरियर कांदी डारै। मंझनियां तरिया ले जाय अउ रगड़ – रगड़ के नहवायै। बिहिनिया संझा कोठा के सफई करै। कहूं मच्छर दिखय त छेना जला के धुंगिया करय। कभू आलस के सेती छन्नू या मन्नू सुस्त दिखे त श्रीकांत पशु चिकित्सक ल बला लाय। जब तक छन्नू – मन्नू फुर्ती नइ देखा दे तब तक श्रीकांत के मन बेचैन रहै।
ओ दिन श्रीकांत गांव गे रिहिस। बइला मन के देख रेख के जिम्मा सुनंदा ऊपर आगे। ओहर बइला मन ल कांदी दे बर गिस। अचानक छन्नूके खूर म सुनंदा के गोड़ खुंदागे। सुनंदा हाय दई, हाय मरगेंव कहत। छन्नू ल गारी देवत कांदी ल वापिस लेगे। मन्नू ल छन्नू ऊपर गुस्सा अइस। अउ गुस्सा म कहिथे – अब भूखे मर। मालकिन जब हमर सेवा करथे, तब तैं ओला दुख काबर देस।
– तैं गलत अर्थ लगा बइठेस। मैं जान बूझके थोरे खूंदे हौं। ओ तो धोखा म खूंदागे।
– तैं लबारी झन मार, मोर ले धोखा काबर नइ होइस ?
छन्नू सफाई दीस। मन्नू नइ मानिस। छन्नू अपन लापरवाही बर माफी मांगिस। मन्नू नाराज रिहिस।
मंझनिया होगे। छन्नू – मन्नू ल न पानी मिलिस न कांदी। भूख म पोट – पोट मरत छन्नू कहिस – संगवारी, मोला जोर लगहा भूख लगत हे। अब तो तैं मान जा। मालकिन मोर से गुस्साय हावै। तहीं कांदी मांग।
बिक्कट करलई करैं म मन्नू मानिस। ओहर हम्मा – हम्मा बोमियाय लागिस। एकर मतलब सुनंदा समझगे। ओहर किहिस – भूखे मरौं। मैं कांदी नइ देवौ मतलब नइ देवौ।
श्रीकांत गांव ले आते लघियात बइला मन मेर जाथे। बइला मन मुंहू ओथरे अइठे रिहिन। श्रीकांत डेर्रागे। ओहर छन्नू ल सहलावत पूछिस – तैं चुपचाप काबर बइठे हस ?
जेकर गलती के सेती अब तक भूखे रेहे ल परिस ओकरे संग बातचीत करत देख मन्नू के गुस्सा तमतमागे। ओहर जोरदार मुड़ी ल हलइस। श्रीकांत ओला पुचकारिस। कहिस – तैं अतेक नाराज काबर हस, मालकिन तुमन ल तंग तो नइ करिस ?
श्रीकांत कोठा म नजर डारिस। उहां कांदी नई दिखिस। कोटना म देखिस त उहू जुच्छा रिहिस। श्रीकांत सुनंदा ल चिल्लइस। सुनंदा खोरवत अइस। श्रीकांत पूछिस – का तैं ये मन ला कांदी – पानी नइ दे हस ?
– कांदी दे बर आय रेहेंव त छन्नू मोर गोड़ ल खूंद दीस। सुनंदा छन्नू के शिकायत करिस।
श्रीकांत उल्टा सुनंदा बर बखुलागे – तोला एक कन लगिस का, ये मन ल दिन भर भूखे रख देस। तैं बिक्कट निरदयी हस।
सुनंदा चुपचाप लहुट गे। श्रीकांत कांदी ल के डारिस। बइला मन ला खाय ल किहिस। बइला मन कलेचुप बइठे रिहिन। पानी देखइस तभो ले बइला मन कलेचुप रिहिन। श्रीकांत किहिस – जब तक तुमन नइ खाहू, महूं नइ खावौं।
मन्नू , छन्नू कोती देखिस। दूनों एक – दूसर के इशारा समझगे – देखथन, ये हर कब तक नइ खाही ?
जेवन बनगे रिहिस। सुनंदा श्रीकांत ल खाय बर हांका दीस। श्रीकांत चु्प्पे रिहिस। छन्नू – मन्नू ह श्रीकांत के प्रतिज्ञा सा साकार होत देखिन। एक दूसर संग गोठियाइन – मालिक हमर मन संग बिक्कट पियार करथे। हमन ल खा लेना चाही। छन्नू – मन्नू कांदी खाये लगिन। श्रीकांत खुश होके खाये बर चल दीस।
एक दिन अमित अइस। कहिस – श्रीकांत, तैं इहां हाथ म हाथ धरे बइठे हस। ओ डहर बजरंगपुर म बइला दउंड़ हावै। उहां छन्नू – मन्नू ल ले चल।
– बजरंगपुर म पहलवान – पहलवान बइला आथे। उहां येमन हार जाही त मोर नाक कटा जाही।
आवाज छन्नू – मन्नू मेर पहुचिस। ओमन ल श्रीकांत के शंका ऊपर गुस्सा अइस। ओमन हुंकार भरिन। भुइंया ल खुर म खुरचिन, मुड़ ल जोर से हिलइन। अमित किहिस – श्रीकांत, तैं पीछू हटत हस। तोर बइला मन दउड़ बर तियार दिखत हावय।
श्रीकांत ल बइला मन ऊपर बिसवास होगे। ओहर ओमन ल बजरंगपुर लेगे। दउड़ शुरु होइस। सुसरी बाजते सांठ बइला मालिक बइला मन ल दउड़ाय लगिन।
छन्नू – मन्नू दूसर बइला जोड़़ी मन ले बिक्कट पिछवागे रिहिन। श्रीकांत ल गुस्सा अइस। किहिस – आखिर, तुमन मोर नाक ल कटवा देव न ?
मन्नू – छन्नू ल आंखी मारिस। दूनों के चाल बाढग़े। श्रीकांत घसिटाय लगीस। ओकर हाथ ले कांसरा छूटगे। छन्नू – मन्नू तय ठीहा म सब ले पहिली पहुंचगे। अमित श्रीकांत ल किहिस – श्रीकांत, तोला बइला मन म बिसवास नइ रिहिस। ये मन अव्वल आय हावय। चल, मोला मिठई खवा।
श्रीकांत मुसका दिस।
दिन – महीना – साल सरकिन। छन्नू – मन्नू ल श्रीकांत के घर आय दस बरस होगे। ऊंकर पसली मांस ले ऊपर झांके लगे रिहिस। आंखी धंसगे रिहिस। श्रीकांत नवा बइला जोड़ी ले के चक्कर म रिहिस। फेर किसान अरुण के कहे मन ओहर टेक्टर ले अइस।
अब खेत के जोताई, फसल के मिंजाई अउ सामान के ढुलाई टेक्टर से होय लगिस। छन्नू – मन्नू ल एक कोठा म छोड़ दे गीस। उहां मरत ल गंदगी रहय।
छन्नू – मन्नू गंदगी के बीच म रिहन। ऊंकर तन भर चिखला लगे रिहिस। पूंछी म माटी के लोंदा बंधागे। पूंछी हलाय म ओमन ल पीरा होत रिहस। महीना बीतगे, ओमन ल नहवाय नइगे रिहिस। ऊंकर तन भर किन्नी छाता बना डारिन।
छन्नू – मन्नू देखय – जउन पइसा के खर्चा उंकर दानापानी बर होय, ओला टेक्टर के डीजल बर करत हावय, ऊंकर रोग खतम करे म जेन पइसा डाक्टर ल देय जाय ओला मिस्त्री ल दे जाथे। जउन मालिक दिन – रात ऊंकर सेवा करै ओहर टेक्टर के पीछू भागत रहिथे।
मन्नू की जीभ करिया गे रिहिस। ओला तडक़फांस के रोग हो गे रिहिस। ओहर खान पीयन नइ सकत रिहिस। भूख म ओहर मरे असन पड़े राहय। छन्नू ओला चांटत राहय। एक दिन मन्नू के परान छूटगे। मन्नू के मरे तन ल गांव वाले मन द्वारा बड़ निर्ममता पूर्वक खींच के कोठा ले निकाले गीस। देख के छन्नू के आत्मा कलपगे।
मन्नू के संग बिताये दिन छन्नू ल पगला असन बना दीस। ओहर घेरी बेरी उठै – बइठै। कभू मोहाटी मेर आय त कभू कोंटा म खड़े रहय। ओकर कोठा म अपने संग लड़त रिहिस।
श्रीकांत मन्नू के मरे तन ल गांव के बाहर छोड़ के अइस। किहिस – सुनंदा, ए सुनंदा …।
सुनंदा आवाज सुन के अइस। पूछिस – काबर चिल्लावत हौ।
– अरे सुन तो, ये देख मन्नू के बदला म दू जोड़ी मोला जुता मिलिस।
श्रीकांत के बात सुन के छन्नू ल खुशी होइस के चलो मरे के बाद भी हम ककरो काम आथन ….।
गांव म कालू आय रिहिस। ओहर बुढ़वा – बीमार अउ अपंग जानवर मन ल ले के दूसर जघा दू पइसा कमा के बेच दे। श्रीकांत सोचिस – छन्नू ल घर म रखे से फायदा का, ओला बेच देथौं।
श्रीकांत, कालू ल बला लइस। कालू छन्नू ल देखिस। किहिस – ये एक हजार के लाइक हे। समझे मंय मरे ल लेवत हौं।
– कालू, तैं पानी के मोल तो झन मांग। श्रीकांत किहिस। मोल भाव होइस अउ चउदा सौ रुपिया म सौदा होगे।
कालू बइठे छन्नू ल लउठी का कोचक – कोचक के उठाना चाहिस पर छन्नू टस के मस नइ होइस। कालू ओकर गला म मोटा रस्सी बांध दीस अउ जोरदार खींचिस तभो ले छन्नू इंच भर नइ खींचाइस। गुस्सा के कालू लउठी ल घुमा के छन्नू ल मारना चाहिस के श्रीकांत के आंखी के आगू म छन्नू – मन्नू के संग बिताये दिन घुमगे। श्रीकांत ल लगिस के ओहर अपन बुढ़वा ददा ल कसाई के हाथ बेंचत हावय। ओहर कालू ल किहिस – कालू, तैं छन्नू ल झन मार …। मैं छन्नू ल नइ बेंचव …।
कालू के ऊपर उठे हाथ धीरे से नीचे आगे। श्रीकांत ओकर हाथ म पइसा ल धरात किहिस – ये रख तोर पइसा ल …। अउ चलते बन। कालू अकबकाय श्रीकांत ल देखते रहिगे अउ श्रीकांत छन्नू कोती अपन पांव ल बढ़ा दीस …।

सुरेश सर्वेद


लेखक परिचय
Sarvedसुरेश सर्वेद
जन्म – 07- 02 – 1966 ( सात फरवरी उन्नीस सौ छैंसठ )
पिता – श्री नूतन प्रसाद शर्मा
माता – श्रीमती हीरा शर्मा
पत्नी – श्रीमती माया शर्मा
जन्म स्थान – भंडारपुर ( करेला ), पोष्ट – ढारा
व्हाया – डोंगरगढ़,
जिला – राजनांदगांव छत्तीसगढ़
वर्तमान पता – सांई मंदिर के पीछे, वार्ड नं. – 16
तुलसीपुर, राजनांदगांव ( छत्तीसगढ़)
मोबाईल – 94241 – 11060
संपादक – साहित्यिक पत्रिका “विचार वीथी “
प्रकाशन – देश के विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं में अनेक
कहानियों का प्रकाशन एवं आकाशवाणी रायपुर से
अनेक कहानियों का प्रसारण।
प्रकाशित कृतियाँ – “ मेरी चौबीस कहानियाँ “ , “ छन्नू और मन्नू “
प्रकाशक –
‘छत्तीसगढ़ी  गरीबा  महाकाव्य’ लेखक श्री नूतन प्रसाद शर्मा
“ सपने देखिये “ व्यंग्य संग्रह लेखक श्री नूतन प्रसाद शर्मा।
आगामी प्रकाशन – “ छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह “ ।

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