सुरता गजानंद परसाद देवांगन

9 दिसमबर पुन्यतिथि

धरती म जनम धरना, जीना खाना अऊ एक दिन इंहा ले चले जाना, अइसन जीवन कतको मनखे जीथे। फेर, बहुतेच कमती मनखे अइसे होथे, जेन दूसर बर जीथे अऊ अपन जिनगी के एकेक समे ला परमारथ म लगाथे। समाज अऊ देस हित बर समरपित होके सुख अऊ सनतोस के अनुभौ करथे। अइसने समाज, सनसकीरीति, साहित्य अऊ धरम बर समरपित बिभूति रहिस सिरी गजानंद परसाद देवांगन जी हा। जेन ला कभु रमायन परबचन, कभु कबिता पाठ त कभु सांसकरीतिक मंच के सनचालन करत देखंय लोगन हा। अभु घला उंकर कबिता अऊ कहाँनी हा समाचार पत्र पतरिका अऊ अकासबानी ले पढ़हे अऊ सुने बर मिल जथे। 1940 के गनेस चतुरथी के जनम धरइया गुरूजी के ननपन हा धमतरी जिला के मगरलोड बुलाक के गराम धौराभाठा म बीतिस। सिरी रामाधीन देवांगन अऊ पारवती देवांगन के मनझला लइका सिरी देवांगन जी ला छत्तीसगढ़ परदेस के इसकूल म सबले पहिली योग सिकछा पराप्त करे के गौरव पराप्त हे। 1972 म धौराभाठा के मिडिल इसकूल म योग परारम्भ करीन।



1973 ले योग के अनियमित सिकछा सासकीय इसकूल छुरा म देवत रिहीन। ओ समे म, इंकर योग के खिल्ली उड़इया कतको मनखे रहंय। फेर पाछू कतको झिन इंकर योग सिकछा ले लाभ पराप्त करके इनला अपन गुरू मानिन। परचार परसार, जुम्मेवारी अऊ समयाभाव म भलुक इंकर योग छुटगे। वइसे भी इंकर नजर म योग केवल सारीरिक क्रिया नोहे बलकि एक मनखे ला दूसर ले जोड़के, भगवान तक मनखे ला जोड़ना रिहीस, अऊ इही ला जीवन परयंत निभइन घला। 9 दिसमबर 2011 के सरग जाये के पहिली लगभग 1500 गीत, कहाँनी, आलेख के रचना कर चुके रिहीन। अभू तक इंकर पांच किताब परकासित हो चुके हे। इंकर याद ला बनाये रखे बर, इंकर बूता ला सम्मान देवत, छत्तीसगढ़ सासन हा सासकीय उच्चतर माध्यमिक साला छुरा के नामकरन ला इंकर नाव म कर देहे। सिरी गजानद परसाद जी देवांगन के व्यकतित्व अऊ बूता ला परनाम अऊ नमन करत, उंकरे भाखा म केहे जा सकत हे –
जौन करतब करके मर जथे,
पूरा होथे ओकरे अधिकार।
जौन दिया बनके बर जथे,
अंगना होथे ओकरे उजियार ॥

संजू एच.एस. देवांगन
छुरा



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