एकलव्य के द्रोनाचार्य बनगे गांधीजी

हमन हर बच्छर 2 अक्टूबर के दिन देस के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जनमदिन मनाथन अउ ओकर देखाय रद्दा अउ कामबुता के सुरता करथन। देस ले अंगरेज मन ल भगाय बर कइसे अपन नीति ल भुंइया मा उतारिन ओला अवइया पीढ़ी ल बताथन। ओकर बताय रद्दा ह आज गांधीवाद बनगे। अहिंसा, सत्याग्रह, अछूत उद्धार,कुटीर उद्योग, बुनियादी सिक्छा , परदेसी जिनिस के बिरोध, गरीब के सेवा, सौचालय स्वच्छता, अउ नानम परकार के बुता करे के रद्दा देखाइन। आज के इस्थिति मा देखथन त जतका मनखे, लोग -लइका, माई लोगिन ( राजनीतिक ) मन 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर अउ अपन सुवारथ के दिन गांधीजी के जय कहिके नारा लगाथे। फेर ओकर बताय बात ल नइअपनाय। अब तो महात्मा गांधी ल एकलव्य के द्रोनाचार्य बरोबर बना बारिन। आघू मा गांधीजी के फोटू राखथे अउ प्रांत संग देस ल बिकास के रद्दा मा लेगतहन कहिके अपन मन के नवा नवा तीर चलाथे। ओ तीर ह निसाना मा परय चाहे झन परय। गांधीवाद मा जानथन अहिंसा ह गांधीजी के सबले बड़का टेनपा रहिस,अहिंसा ले अंगरेज ल भगाय रहिस। भरम मा आजादी के पाछू हमन अब अपन कोई भी मांग पूरा कराय खातिर पंडाल लगाथन अउ गांधीजी के फोटू ल राख के पूजा करथन पाछू रुप बिकराल हो जाथे। रैली, तोड़फोड़,आगी लगाना, मार मर्दन,आगी मा भुंजना, रिकीम रिकीम के उपद्रव। कहां गय गाधीवाद अउ अहिंसा? अइसने दूसर बल रहिस सत्य अउ सत्याग्रह। फेर आज सत्य ला कोन बिला मा बोज दिन समझ नइ आवत हे। करमचारी, अधिकारी, बेपारी, नेता, मंतरी सबो के मुंहू ले सत्य लुका गे हावय। झूठ अउ फरेब ले देस चलत हावय। देवता रुप गरीब ल झूठ बोलइया बना दिन।
गांधीजी के तीसर सिद्धांत रहिस छूवाछूत ल नइ मानना। एकखर बर अपन परिवार संग लड़ई करीन। आज गांधी के फोटू के आगू जातिवार आरक्षन, अल्पसंख्यक, बिसेस पिछड़ी जाति, गरीबी रेखा के नीचे , ऊपर आनी बानी के तीर छोड़त हे केवल वोट सकेले अउ सरकार बनाय बर। सौचालय के स्वचछता बर कस्तुरबा माई के संग झगरा मातगे रहिस। गांधीजी के कहना रहिस अपन पाखानाघर ल हम्मन ल खुद सफईकरना चाही सिपर बलाय के जरुत नइ हे। आज आफिस , इस्कूल, अस्पताल, मंतरालय, अधिकारी, मंतरी के घर सबो जगा सिपर के पद निकाल के सफई करात हे। गांधीजी के सिद्धांत ल चुल्हा मा डार दिन। गांव-गांव, सहर -सहर, गली -गली, घरोघर सौचालय बनाय जाथे। फेर बउरत कतकाझन हे? कतकोझन के सौचालय कागज मा बन के बउरात हे। गांधीवाद के एक उदिम मा कुटीर उद्योग रहिस जौन देस ल अजाद करेबर, स्वावलंबी बनेबर अउ बिदेसी जिनिस लाना बेचना बंद करेबर नीक रिहीस।
देस मा ओ बखत रुपया अउ डालर के मान बरोबर रहिस। आज चाणक्य के नीति नंदागे। गांधीजी ह बिदेसी जिनीस के होली जला के बिरोध करिन अउ आज के एकलव्य मन गेट समझौता, डंकल,विस्वबेपार ग्लोबलाइजेसन, संधि अउ आनी बानी के नांव धरके स्व रोजगार ल चाइना, जापानी बेवस्था मा बेच के राख कर दिन। सबले जादा तहस नहस करिन हमर सिक्छा बेवस्था ल। गांधीजी सिद्धांतिक रुप मा बुनियादी सिक्छा के हिमायती रहिन। अंगरेज के सिक्छा बेवस्था ल बदलके गुरुकुल बेवस्था बनवाय चाहिस। जिहां पढ़ई के संग कुटीर उद्योग सीखय। फेर आज के एकलव्य मन अंगरेजी सिक्छा मा देस के भविसमन ल झोंक दिन। अब लइका अपन संस्कृति ल भुला गे अउ बिदेसी संस्कृति ल सीख नइ सकिस। गांधीजी पस्चिमी सभ्यता के बिरोधी रहिस। आज देस के मोटियार सब उही डहर जावत हे। ओकर सेती सबो बेरोजगार होगे। गांधीजी सिक्छा ल माई भाखा मा देय के हिमायती रहिन। अब तो गांधीच ल पुस्तक ले निकाल के ओकर हइतारा के संग ओकर संगवारी मन के महिमा गाय अउ पढ़ाय के उदिम करत हावय। आज भारत उदय, इंडिया सायनिंग के नांव लेके बिदेसी निवेस कराय जात हे। देस के कुटीर उद्योग के भट्ठा बइठा दिन। आज डालर अउ रुपया मा हिमालय अतका अंतर आ गे हावय। गांधीजी सत्ता के विकेन्द्री करन के हिमायत करय फेर आरक्छन अउ भरस्टार मा वहू अपन उपर कलंक लगा डारिन। अइसने कोरी दू कोरी रद्दा हे फेर अब ओमे कोनो रेगेंबर नइ चाहे। गांधी के फोटू ल राख के लोगन ल भरमा के कब तक देस ल बिनास के कुआं मा ढकेलत रही। ओकर सिद्धांत ल तोपढांक के कब तक देस के पीठ मा चाकू बेधही?

हीरालाल गुरुजी ” समय”
छुरा, जिला गरियाबंद



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