कोरा तलासत गांधी

मोर देस के हालत बहुतेच खराब हे एक घांव कइसनो करके भारत म फेर जनम धरन दव आनदोलन पुराके तुरते लहुंट जहूं – गांधी गोहनावत रहय। चित्रगुप्त किथे उहां अवइया हजारों बछर बर कोरा के एडवांस बुकिंग चलत हे। कन्हो खाली निये काकरेच कोरा म डारंव ? बरम्हा जी समाधान निकालत किहीन के गांधी जी पिरथी म जाही माने पिरथी के भला होही। एला अपन मन मुताबिक कोरा पसंद करन दे बाकी ल में बना लुहूं। गांधी जी खुस होके पहुंचगे कोरा के तलास म।

गांधी सोंचे लागीस येदे बड़े जिनीस मनखे के घर आय। आनदोलन बर पइसा के आवसकता परही येकरे घर जगा मिल जतीस ते बने होतीस। काकरो करा सतनतरता आनदोलन कस हाथ लमाये बर नी परतीस। बनइया महतारी तिर जाके पूछे लागीस दई तोर कोरा म आना चाहत हंव। दई पूछथे तैं कोन अस बेटा ? गांधी जवाब दीस गांधी अंव दई। दई फेर पूछीस कोन गांधी ? गांधी किथे ये देस म अजादी लनइया गांधी अंव दई ….। दई फेर पचारिस हमर देस तो अभू अजाद हे बेटा। तैं इहां आके काये करबे ? फेर मोरे तीर काबर आथस बेटा ? गांधी बतइस में तोर दुख दूर कर दूहूं दई । संगे संग गरीब मजदूर मन ला मुड़ी उठा के जिये सिखा दुहूं। दई किथे मोला कहीं दुख निये बेटा। तोर ददा के अतेक अकन कारोबार हे। अतका पइसा नौकर चाकर हे मोला काके दुख। तें फोकट झिन आ। बलकी तैं जब मोर कोरा म आबे त दुख हमर घर म उही बेरा ले खुसर जही। गांधी अवाक होके किथे कइसे दई ? दई किथे तैं आबे तहन हमर अतेक बड़ कारोबार ल समहाले छोंड़ गरीब मजदूर मन ला हक देवाये बर हमरे खिलाप भड़काबे। जगा जगा आंदोलन चलाबे हमरे पइसा उड़ाबे हमीं ल बरबाद करबे। सही सही टेक्स पटाबे हमर पुरखा के कमाये चीज बस ल फोकटे फोकट एला वोला बांटबे। अऊ तैं तो चैन के नींद सुत जबे तोर ददा के का होही ? चार दिन के जिअइया तोर बबा दूयेच दिन म ढलंग दिही। तैं दूसर कोरा देख ले बेटा।

गांधी सोंचत हे बड़े जिनीस कारोबारी घर जनम धरे म सहीच म कहूं ओकर कारोबार म फंदागेंव त वाजिम म मोर जनम धरे के मकसदेच पूरा नी हो पाही। भगवान मोला बचां लिस। येदे घर थोकिन छोटे कारोबारी वाला आय। इंहें देखथंव ……..। दई देखके गांधी पूछे लागीस दई तोर कोरा म जगा देबे का या….? मय गांधी अंव दई तोर जम्मो दुख के निवारन कर देहूं। दई किथे रहा तोर ददा ल पूछन दे तंहंले बतावत हंव ….। थोरिक बेर म दई किथे मोर सवाल के जवाब दे तभे बता पाहूं। गांधी किथे पूछ न दई पूछ। दई पूछीस तोर ददा पूछत हे हमर कस जनता ल मिलावटी अऊ नकली माल बेंच सकबे ? गांधी निही किहीस। दई फेर पूछीस झूठ गोठिया बता के टेक्स बचा सकबे ? गांधी निही कहत मुड़ी हलइस। दई फेर पचारिस पुलीस ल गलत सलत बता के अपन ददा ल बचाबे ? गांधी किथे में गांधी अंव दई मोर से अइसन उमीद काबर……। दई किथे बने करे बेटा। आये के पहिली पूछ ले में तोर पांव परत हंव ……….। तैं दूसर गरभ देख ले।

गांधी मने मन सोंचत हे। बियापारी मन मोर ले नराज हें कस लागथे। अंगरेज मन बियापारेच करे बर इहां आय रिहीन। उही मन ला भगा देन त ओकर संगवारी मन के नराज होना वाजीब आय। में जनम धर तो लंव जम्मो ठीक हो जही। बड़े अधिकारी के बंगला म खुसरगे। दई तोर कोरा म आहूं या …… ? गांधी पूछत पूछत बताये लगीस मय गांधी अंव गांधी। दई सवाल उठइस तैं काये करबे बेटा …….. ? ये देस म अभू कहींच समसिया निये। अऊ जे हे भी तेकर बर हमर साहेब हे न। बड़का ले बड़का समसिया ल चुटकी म निपटा देवत हे। तोर आवसकता निये। तैं आबे ईमानदारी जताबे। करिया धन सकेले बर मना करबे। भरस्टाचार करन नी देबे। त देस म समसिया अऊ कतको गुना बाढ़ जही। अऊ हमरे कस निकल जबे त करिया धन कमा कमा के बिदेस म कोठी भरबे इही चक्कर म परेसान होवत रहिबे। तोर आय ले कहूं हमीं मन बदल गेन त हमन परेसान रिबो हमरे सुख ल गरहन तीर दिही। नानुक फरिया पहिर के गमछा लपेट के देंहे देखावत किंजरबे तब तोला कोन हांसही ? हमन ल हांसही। हमर नोनी मन के कमती कपड़ा पहिरे के अधिकार ल नंगाबे ………..। तेकर ले कन्हो अऊ फइरका देख ले बेटा ………।

गांधी सोंचीस बड़का साहेब मन समसिया विहीन हे। करमचारी के घर खुसरहूं। उही मन रात दिन समसिया गरस्त रहिथें। पूछतेच साठ दई केहे लागीस सरकार हमन ला अतेक तनखा नी देवय बेटा के तोर जइसे बड़े आदमी ल पढ़हा लिखा पाल पोस सकन। गांधी किथे दई मय देस के बेवस्था सुधारे बर आहंव। पढ़हे लिखे खाये पीये बर निही। दई पूछथे बिन खाये पीये बिन पढ़हे लिखे का कर डारबे ? हमर ताकत तोला सरकारी इसकूल म पढ़हाये के हे जिंहा न कहींच सीख सकस न जान सकस त कायेच आनदोलन खड़ा कर सकबे ? पराइवेट इसकूल म भेजीच देबो त खाबो कामे काये पहिरबो ? दू चार पइसा एती वोती ले कमातेन तहू ल तैं नी कमावन देबे त तोर डोकरी दई के दवई कइसे आही ? तैं दूसर दुवारी देख जिंहा तोर सिकछा दीकछा बने होये …. अऊ आनदोलन चला सकस …..।

गांधी रेंगत रेंगत सोंचत हे इहां के मनखे मन कतेक समझदार होगे हे। दई बपरी ठीके कहत हे कस लागथे …। महल कस खइरपा फेर ललचा दीस गांधी के मनला। सुरू के अनुभौ के सेती झिझकीस घला फेर आनदोलन बर धन के समसिया के सुरता आतेच भार खुसरगे। पहिली सोंचीस बिन पूछे खुसरहूं पूछथंव त मना कर देथे। फेर मन नी मानीस पूछ पारीस दई तोर कोरा म आतेंव का या ….? दई किथे तैं मंगइया गांधी अस का बेटा …….। हमन सरी दुनिया ल चनदा बांटथन तैं एती वोती चनदा मांगत किंजरके हमन ल बदनामी देबे। तोर ददा ल ठेकेदारी के नावा नावा तरीका सिखाबे घर बनाबे ते टूटही निही। सड़क बनाबे तेमा खंचका नी होही। बांध बनाबे ते बोहाही निही। अतका ईमानदारी देखाबे त एके बछर म हमर घर टूट जही हमी मन सड़क म आ जबो। हमन बेंचा जबो त तोर बर काये बचा पाबो। तैं किरपा कर दूसर गरभ देख ले बेटा।

गांधी सोंचे लागीस के देस म कानून बेवस्था ठीक रहितीस त समसिया अइसने खतम हो जतीस। चल नियावधीस के घर। दई ला पूछीस दई मोला जनम देबे या ….. ? दई किथे – हव बेटा तोला खत्ता म जनम देहूं फेर……। गांधी ल पहिली बेर कन्हो हव किहीस वो खुस होतीस तेकर पहिलीच फेर सब्द ओकर माथ ल ठनका दीस। गांधी पूछथे काये फेर दई….. ? दई बतइस अइसे कन्हो दिन नी होय जब तोर ददा ला कन्हो नी धमकाये या पइसा के लालच नी देवय। तैं धमकी सुन नी सकस। पइसा लेवन नी देवस ? तोर ददा हा नियाव करथे त सरग के रसता खुल जथे। जमीर बेचथे त धरती म सरग बन जथे। तैं धरम के नियाव के रद्दा म रेंगइया अस जेला पहिली भी सिरीफ इहीच पायके मार दे गे रिहीस। एक घांव फेर कन्हो महतारी के कोरा सुन्ना झिन होय। कन्हो सोहागन के मांग झिन उजरे तैं मोर कोरा म झिन आ बेटा। अपन जान म खेल के नियाव के रद्दा अखतियार करी लेबोन त देस चलइया सायदे कनहों मनखे जेल के बाहिर रहीं। तब ये देस ल कोन चलाही ……. तैं अकेल्ला चला डरबे ? तोर ईमान ल घरिया अऊ मोर गरभ म खुसर या मोर गरभ के रसता छोंड़ अऊ दूसर बर रसता बना। कलेचुप निकलगे गांधी जी……।

मोर सोंचना गलत हे का रे ? एकर माने देस के बेवस्था के गड़बड़झाला के पाछू कन्हो अऊ हे ठीक हे महूं गांधी अंव हार नी मानो। पुलीस के घर जनम धरहूं इंहे पता चलही कोन धमकाथे। दई में गांधी अंव तोर कोरा म जनम धरतेंव या …. जदि तोर आगिया होतीस ते …? दई किथे वा….. अतेक बड़ मनखे ….. कहूं बने घर नी देखते बेटा। तोला जनम दे म कते महतारी गरब के अनुभौ नी करही। गांधी किथे दई में भरस्टाचार अतियाचार अऊ व्यभिचार ल खतम करे बर आये हंव या…..। मनखे मन कतेक ससता म बिकत जावत हे। ऊंकर असली कीम्मत बताये बर आये हंव। जमाखोरी हरामखोरी अऊ नशाखोरी ल जर ले मेटाये बर आय हंव। दई किथे वा…. तोर ददा घला अइसनहे सोंचथे बेटा। वाह…….. मोर तलास पूरा होगे कस लागत हे गांधी मने मन खुस होवत केहे लागीस त में खुसरत हंव दई। दई किथे गोठ ल पूरा होवन दे तहन आबेच निही गा…..। फेर तोर कस मनखे ल ये देस म लुका के रेहे बर परही। गांधी पूछीस काबर दई ? मय कन्हो अपराधी थोरेन अंव। दई बतइस बेटा तैं अपराध करबे तभे तोर नाव उजागर होही। गांधी पूछथे त अइसनेहे कन्हो नाव कमाही या ……. ? अइसने मनला धर के जेल म नी डारे का हमर ददा हा ….. ? दई बतइस इहीच मन ल सनरकछन देना ऊंकर बूता अऊ करतव्य आय। गांधी मुहुं ला फार दीस का….. ? दई किथे तिहीं केहे न अभीच्चे के मनखे ल ओकर सही कीम्मत पहिचाने बर आना चाही तोर ददा एमन ले अपन सही कीम्मत वसूलथे। गांधी किथे ये तो गलत हे दई .. ? दरोगीन भड़कगे का गलत अऊ का सही तेला तेहा सिखाबे रे ….। निकल मोर दरवाजा ले। निही ते अभीच्चे अनदर करा दूहूं।

बुरई के जर कहूं अऊ हे तइसे लागथे। धियान अइस अपन संगवारी मन के लइका के। गांधी जइसे पहुंचीस दई ओकर पांव परीस। अब पहुंचेंव सही जगा म कस लागत हे। खुसी के मारे फेर पूछीस दई मोला तोर बेटा के रूप म जनम देबे या …..? दई खुस होके किथे गांधी मोर सनतान बने एकर ले बढ़के मोर बर का हो सकत हे। तोरे कारन तोर बबा कतका बछर ले राज करीस। तोरे कारन तोर बाबू आज भी राज करथे। तोरे नाव के सेती सात निही सत्तर पीढ़ही बर धन दउलत जमा कर डरे हाबन। तोर नाव ले कतको असमभव बूता छिन म हो जथे चाहे हम पक्छ म रहन या बिपक्छ म। हम चारा खाथन त नी पकड़ावन। तोप खाथन तभो नी उड़ावन। कोइला खाथन तभो मुहूं नी करियाये। स्परेक्टम खाथन तभो नेटवर्क बने रहिथे जम्मो तोरे नाव के परभाव आय। ते हमर हथियार अस बेटा जलदी आ। तोर ददा एक ठिन घोटाला म फंसे हे सेट नी होवत हे। ते आते त यहू हो जतीस। तंहंले तोर ददा के खुरसी अऊ सत्ता तोरेच ताय। हमर काय आज के रेहे काली के गे …। खुरसी अऊ सत्ता के नाव ले गांधीजी के देहें कांप गे। अजादी के पहिली घला अइसनेच लालच देखइन फेर सत्ता समहाले के दिन गली गली भटके बर छोंड़ दीस। गांधी किथे में सत्ता पाये बर खुरसी म कुला मढ़हाये बर नी आथंव भरस्ट मनला जेल म डरवाये बर आवत हंव। दई किथे तैं सत्ता पाये बर नी आथस त मोर कोरा म काये करे बर जनम धरबे ? सत्ताधारी के लइका सत्ताधारी नी बनही त ओला ओकर घर जनमना नी चाही। समे के पहिली बता दे ठीक करे। तोर जइसे बेटा पायेके सपना देखे रेहेंव फेर तें मोर आंखी उघार देस। हमर उन्नति बर तोर नावेच काफी हे। तैं कन्हो जनता के घर जा उंहे तोर आवसकता हे। अपन गरभ के मुहूं ल तोप दीस ……।

हार खावत सोंचत हे गांधी के जनता के घर जाहूं कहूं उहू मना कर दिही तब ? सरग म कइसे मुहूं देखाहूं ….। आखिरी परयास करीच लेथंव। दई ला पूछीस में गांधी अंव तोर कोरा म जनम धरतेंव या …… ? दई किथे आ बेटा आ पहिली बेर मोला पूछ के आवत हे मोर सनतान। निही ते जेकर जब मरजी होथे चले आथे। हमन रोके के कतको उपई करथन तभो। गांधी पूछथे का….. ? दई बतइस हां बेटा परिवार नियोजन करवाथन तभो साल दर साल खसखस ले बिया डरथन सरकारी हसपताल के किरपा ले। परइवेट म कराथन त कन्हो गरभ निकालथें कन्हो किडनी …। फेर तेंहा मोर घर आके काये करबे ? गांधी बतइस अमीरी अऊ गरीबी के बीच के गड्ढा ल पाटे बर आथंव दई ..। दई किथे तब ते कुछू नी कर सकस बेटा। ये गड्ढा हमर लास म पटाथे। तहूं लास बनबे त हमर कस्ट कबेच मेटाबे ? मोर पहिली अतका अउलाद हे जेला पोसे पाले बर कतका पापड़ बेलथंव। तोर इनतजाम कइसे होही तैं ठहरे बड़े आदमी। बड़े मन संग तोर दोसती। गरीबी भुखमरी अऊ लचारी के संग रहिथन हमन एमा वो ताकत निये जे तोला खड़ा कर सकय। हमरे कस तहूं गुमनामी म झिन सिरा जास डर लगथे। तोर आये के बड़ खुसी हे बेटा फेर तोर जनम दिन मनाना तो दूर तोला बिहिनिया बियाहूं संझा तोर दूध बर कमाये बर जाहूं। तोला बियाना मतलब सिरीफ नावेच कमाना हे बेटा फेर तोर नाव ले मोर कस जनता के पेट नी भरय। में कमाहूं तभे मोर रंधनी खोली ले कोहरा निकलही तब तोर हाथ ले कउर उठही। तोर कस कपड़ा पहिर के तोर नाव ले खवइया बहुत नंगरा देखे हन हमन। तोर बर खाये के लाहूं त कन्हो तोर नाव ले यहू मन खावत हे कहिके बदनाम झिन करय। जदि ते सहींच के गांधी होबे त तोला जनता के बेटा आस कहिके तोर अगुवाई ल कोन सवीकारही ? ओकर सेती तोला मय अपन गरभ म धारन जरूर करिहंव फेर उहां ले बाहिर नी आवन दंव अपन भीतर गांधीपन के अहसास करत जी लेहूं। गांधी पूछीस गरभ ले जनम नी धरहूं त तोर तकलीफ ल कइसे मेटाहूं ? दई किथे सच बतांवव बेटा तोर पहिली कतको झिन गांधी बनके मोर गरभ म अइन फेर बाहिर आके नाथू बन गीन। घेरी बेरी गांधी बन के आथे सपना देखाथें फेर खुदे सपना हो जथें। हमन मुहूं फार के ताकथन वो लात मार के निकल जथे। वो भुला जथे हमन ल जब पनचायत अऊ सनसद के देहरी म पहुंच जथे। में नी चाहंव तहूं बाहिर आ पनचायत अऊ सनसद के हिस्सा बन अऊ भुला जा हमन ला …..। मोर सरत मनजूर हे त मोर गरभ के दरवाजा तोर बर खुल्ला हे तैं परवेस कर। में उही दिन ले अपन गरभ के मुहूं ल अइसे चमचम ले मूंदहूं के तोला मोर ले कन्हो अलग झिन करे सकय। डर्रागे गांधी जी पल्ला भागीस……..। एक कोती दई समझिस के गांधी आना नी चाहत हे अऊ दूसर कोती गांधी जान डरीस के जनता गांधी बियाना नी चाहत हे तेकर सेती रात दिन दुख म डूबे परे हे।

पहिली बेर अतका हतास अऊ निरास रिहीस गांधी। अभू गरभ निही सानती तलासे लागीस। आसरम के बगीच्चा ले फूल म सजत एक झिन दई दिखगे। सोंचीस एक परयास अऊ …। ये दारी बिन पूच्छे खुसरगे मउका मिलते साठ ..। दई ल जइसे पता चलीस के वोहा पेट म हे अब्बड़ेच रोये लगीस। गरभ भितरी ले गांधी केहे लगीस दई तैं झिन रो में आ गे हंव तोर दुख ल मेटा देहूं …..। दई किथे तोर आयेच के तो दुख हे बेटा। तैं हमर अवैध सनतान अस। गांधी किथे अवैध कइसे दई ..। जे दाढ़ही वाला तोर संग म अभू रिहीस तउने मोर ददा आय का ….? दई बतइस जेला ते ददा कहत हस ओहा ये आसरम के परमुख आय बेटा। उही नी चाहे के तैं जनम धर। गांधी अपन रंग देखाना सुरू करीस अऊ केहे लगीस चल थाना रिपोट करबो। अइसन मन ल चैन ले नी जियन देवन। दई किथे का कर लेबो बेटा दू दिन जेल म रही बाहिर आही फेर कन्हो अबला के पेट ले खेलही। मोरे बदनामी होही ओकर काये बिगरही। इनसाफ के मिलत ले तोर मोर पीढ़ही तो चली दे रही दुनिया ले। एती दाढ़ही वाला जान डरीस के दई गरभ म हे उही रात दई के भात म काये मिला के खवा दीस …………….। दई पेट पीरा म रात भर तड़फीस गांधी पेट भीतरी छटपटाये लगीस बिहिनिया जब दई ल होस अइस तब गांधी जी चौक म खड़े अपन पुतला म खुसर के सुसकत रिहीस। गांधी न सरग जा सकय न ओला कन्हो बियाये बर तियार। अभू घला ये सहर ले ओ सहर ये गांव ले वो गांव ये पारा ले वो पारा ये चउराहा ले वो चउराहा किंजरत हे कन्हो कोरा म जगा पाये के उमीद म …….।

हरिशंकर गजानंद देवांगन
छुरा

संघरा-मिंझरा

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