गणेश चतुर्थी पर कविता

जय जय हो गजानन तोर जय हो,प्रभु
दुनिया ला देखे अपन आए कर कभु।
तोर अगोरा पुरा साल भर तो करथन,
संग हमर हमेशा रईह जुगाड़ कर प्रभु।।

बस भादो के का दस दिन हे,
तोर इँहा आए के निश्चित बेरा।
कतको रोज पूजे तोला इँहा हे,
अब तो डार ले सदादिन डेरा।।

पहिली पूजा हरदम तोरे करथन,
तहाँ फेर दूसर देवन ला भजथन।
अब देख हमेशा हमर हे करलाई,
प्रभु इँहा हम रोज दु:ख पावथन।।

नौ दिन सेवा तोर हम करथन,
अऊ तो दसवां दिन बोहवाथन जी।
खुरमी ठेठरी बरा सोहारी के तो,
हम पहिली तो भोग लगाथन जी।।

किसिम किसिम के रिंगी चिंगी,
लाइट मंडप तोरे तो सजाए हन।
फेर दया घलो तैं देखाये नि बप्पा,
जीवन अंधियारी हमन पाए हन।।

संग मा अपन रिद्धि सिद्धि लाथस,
ओ शुभ लाभ के बड़ सुंदर कहानी।
कभू काबर ,संग में कान्हा नि लाच,
अब दुष्ट के कईसे मिटय कहानी।।

भगत के सुनले तैं अब तो गोहार,
ए महिमा तोर बड़ हावे अपरम्पार।
अब आबे ते झैन जाबे हावे पुकार,
चारों डहर अब तोर हावे जैजैकार।।

पं.खेमेश्वर पुरी गोस्वामी
मुंगेली – छत्तीसगढ़
७८२८६५७०५७
८१२००३२८३४

संघरा-मिंझरा

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