बाबा घासीदास जयंती – सतनाम अउ गुरु परंपरा

गुरु परंपरा तो आदिकाल से चलत आवत हे। हिन्दू धरम मा गुरु परंपरा के बहुत महिमा बताय हे।गुरु के पाँव के धुर्रा हा चंदन बरोबर बताय हे , प्रसाद अउ चरणामृत के महिमा ला हिन्दू धरम मा बिस्तार से बरनन करे जाथे।घर मा गुरु के आना सक्षात भगवान आयबरोबर माने गय हवय। सनातन धरम मा तो गुरु शिष्य परंपरा के बहुतेच बढ़िया बरनन मिलथे।कबीर पंथ मा घलाव गुरु पुजा के महत्तम ला बताय हे।आज भी गुरु परंपरा सबो पंथ मा चलत हे। कबीरदास जी हा गुरु ला भगवान ले बड़े कहे हे।गुरु हा ज्ञान रुप प्रकाश देवइया होथय। तन अउ मन दूनो के अज्ञान ला मिटाथे।
सतनाम पंथ मा घलाव गुरु परंपरा आज भी चलत हे। गुरु बाबा घासीदास के जनम अइसे बखत मा होइस जब हमर देश के इस्थिति परिस्थिति हा अलगेच किसम के रहिस।शाहजहाँ के मरे के पाछू औरंगजेब हा गद्दी मा बइठिस।वो बखत समाज मा ऊँच नीच, छुआछूत, घृणा, झूठ, कपट के भाव रहिस।जइसे संत अउ गुरु हमेशा समाज ला सुधारे अउ सही रद्दा मा रेंगे बर बताथे। वइसने बाबा घासीदास हा वो बखत गुरु के दायित्व ला निभाईस अउ अपन गिरे पड़े पिछड़े भाई बहिनी मन ला समाज के मुख्य धारा मा लाय के प्रयास करिन।ओकर पाछू उँकर बिचार ला सतनाम आंदोलन बनाके उँखर बेटा अमरदास, बालकदास अउ आगरदास हा घलाव बगराइस।
सतनाम समाज हा गुरु प्रधान समाज आय।इहाँ गुरु सतनाम नियम के अनुसार समाज के सब धार्मिक, सामाजिक अउ सामुदायिक कार्य मा मार्गदर्शन देथँय अउ असीस देथे।सतनाम समाज मा गुरु के निर्णय सर्वमान्य होथे।गुरु उपदेस ला ईश्वर आदेस समझे जाथे।चेला बने के अउ कान फूँकाय के परंपरा पंथ मा हवय। संत चरित्र अउ बाबा जी के जौन भगत होथय वोकर ले कान फूँकाय जाथे उही ला गुरु माने के परंपरा चलत हे।
बाबा घासीदास हा सतनाम समाज के प्रथम गुरु अउ पंथ संस्थापक आय।जब कोनों पंथ के स्थापना होथे तब ओकर कुछ उद्देश्य बनाय जाथे।जौन संस्थापक होथय उही ला प्रथम गुरु माने जाथय।गुरुनानक देव भगवान बुद्ध, कबीर साहेब एहू मन अइसने गुरु आय।सतनाम पंथ के स्थापना करत बाबा जी हा कुछ उद्देश्य बताइस। मनखे मनखे एक समान समझव। गुरु वंशज के मान सम्मान करव।गुरु पूजा, निछावर (दान )अउ चरणामृत लेना अनिवार्य बताइन।सत्य अउ अहिंसा के पालन करे बर सिखाइस।पंच तत्व के चिन्हा गुरुगद्दी जैतखाम के पूजा करेबर जोर करिन।सतनाम धरम बर सोमवार के व्रत , पूजा,प्रसाद बाटना अउ सादा रंग के अंगरखा पहिरना धरम बताइस।गुरु बाबा बताइस कि बिहनिया अउ संझा सुरुज ला माथ नवाय बर चेताइस। जीव हत्या अउ माँस खाय बर बंधन लगाइस।गुरु पूजा, जैतखाम पूजा के संगे संग समाज के मनखे ला छड़ीदार , राजमहंत अउ भंडारी बनाय बर बताइस।अइसने किसम के समाज के कल्याण अउ मनखेमन के जिनगी सुधारे के रद्दा बताइस।सतनाम पंथ गुरु शिष्य परंपरा आज घलाव चलत हे। गुरु हा साधु संत बरोबर होथय , सतनाम पुराण के माध्यम ले समाज के मन ला सुग्घर जिनगी जीये के रद्दा बताथे कान फूँकथे अउ चेला बनाथे।सतनाम पंथ के मनइया मन आज देस अउ बिदेस मा बगरे हवय।गिरौदपुरी धाम अउ जैतखाम के सोर संसार मा बगरे हवय।

संकलन
हीरालाल गुरुजी”समय”
छुरा,जिला-गरियाबंद

संघरा-मिंझरा

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