ग़ज़ल छत्तीसगढ़ी

भैया रे, तै हर नाता, अब हमर ले जोड लेबे,
जिनगी के रद्दा उलटा हे, सँझकेरहा मोड़ लेबे।

पहती सुकवा देखत हावै, सुरुज अब उगइया हे,
अँधियारी संग तै मितानी, झप ले अउ छोड़ देबे।

बिन छेका-रोका हम पर घर आबोन-जाबो जी,
बड़का मन ल करे पैलगी, कहिबोन बबा गोड़ देबे।

कइसनो राहय सरकार इहाँ, हमला का करना हे,
समरसता लाये बर संगी, जम्मो डिपरा कोड़ देबे।

कौनो परोसी निंदा करथे, अपने घर में आ के,
मन हर कहिथे भाई संग, तैं ह नाता तोड़ देबे।

बलदाऊ राम साहू

संझकेरहा=शीघ्रतापूर्वक, पहती सुकवा=सुबह का शुक्रतारा, पर=दूसरे, गोड़ = पाँव, झप ले=शीघ्र, आबोन-जाबो=आएँगे-जाएँगे, डिपरा=ऊँचा भाग, कोड़= खोद

भैया रे, तै हर नाता, अब हमर ले जोड लेबे,
जिनगी के रद्दा उलटा हे, सँझकेरहा मोड़ लेबे।

पहती सुकवा देखत हावै, सुरुज अब उगइया हे,
अँधियारी संग तै मितानी, झप ले अउ छोड़ लेबे।

कइसनो राहय सरकार इहाँ, हमला का करना हे,
समरसता लाये बर संगी, जम्मो डिपरा कोड़ लेबे।

कौनो परोसी निंदा करथे अपने घर में आ के,
मन हर कहिथे भाई संग, तैं ह नाता तोड़ लेबे।

बलदाऊ राम साहू

संझकेरहा=शीघ्रतापूर्वक, पहती सुकवा=सुबह का शुक्रतारा, पर=दूसरे, झप ले=शीघ्र, लेबे=लेना, डिपरा=ऊँचा भाग, कोड़= खोद,

संघरा-मिंझरा

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