ग़ज़ल : गीत ग़ज़ल ल गावत हावस

गीत ग़ज़ल ल गावत हावस, का बात हे?
सच दुनिया के जानत हावस, का बात हे?

अंतस मा तो पीरा हावै गजब अकन,
पीरा ला समझावत हावस, का बात हे?

पाप के दहरा मा बुड़े मनखे मन ला,
गंगा पार लगावत हावस, का बात हे?

कुंभकरन कस सुते हावैं, इहाँ जउन मन,
हाँक पार जगावत हावस, का बात है?

साँप बरोबर मेरड़ी मारे हावै जउन,
उनला दूध पियावत हावस, का बात है?

बलदाऊ राम साहू

1,गजब अकन=बहुत 2. दहरा=नदी का गहरा भाग 3. बूड़े=डूबे 4. मनखे=मनुष्य 5.मेरड़ी= कुंडली

संघरा-मिंझरा

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