व्‍यंग्‍य-हनुमान के जात

बैकुण्ठ धाम म भगवान राम ह माता सीता संग सुंदर सिंघासन म बिराजमान होके इहलोक के संबंध म चरचा करत रहय वतकी बेरा म हनुमानजी उंहा पहुंचथे अउ पैलगी करथे।हनुमान जी ल उदुपहा बैकुण्ठ धाम म आय देखके श्री रामचंद्र ल बड अचरित लागथे।ओहा हनुमानजी ल पूछथे-कैसे पवनपुत्र!आज उदुप ले इंहा कैसे!कलजुग सिरागे का?
हनुमानजी ह भगवान श्री राम जी ल बताथे-आप तो बैकुंठ म बिराजे हव परभु!!मे ह कलजुग म तुंहर भजन गाए के लालच अउ कलजुग म अवतार के अगोरा के सेती पिरथी म रूके हंव।फेर मोर ऊपर कलजुग म बिपदा आगे हे परभु!!
भगवान ओला फेर पूछथे-बने फोर के बता हनुमान!!सोयम संकट मोचन ऊपर का संकट आगे हे?
हनुमानजी किथे-आप तो अंतरयामी हरो परभु!काबर ठिठोली करत हव!फेर पूछत हव त बतावत हंव।आजकाली पिरथी म महूं ह राजनीति के पेरना म पेरावत हंव।उंहा के मनखे मन तुंहर भगत के जात ऊपर सवाल उठावत हे परभु!कोनो मोला दलित हरे काहत हे,कोनो आदिवासी काहत हे ,कोनो जाट त कोनो ह मोला बाम्हन बतावत हे दशरथनंदन!!
भगवान राम ह मुस्कावत हनुमानजी ल किथे-मनखे ह मनखे ल पहिलिच के जात बिरादरी म बांट के खून-खराबा म लगे हे अंजनी नंदन!जेन भुंइया म मे जनम धरे रेहेंव ओकर अतेक दुरगति होही किके बिधाता घलो नी बिचारे रिहिस होही।उंहा के मइलाहा राजनीति ह मनखे के मति ल छरिया देहे।सत्ता के लालच म उंकर आंखी ह मूंदा गेहे।जब जब उंहा चुनई के समे आथे।नवा-नवा उदीम शुरू हो जाथे।एसो चुनाव हे का पवनपुत्र!पिरथी म?
हनुमानजी किथे-मोला तो तुंहर नाम के भजन गाए-सुने अउ भगत मन के बिपत हरे म फुरसत नी मिलय।फेर रमायेन पढे के ओखी म मोर चंवरा म बइठके मनखे मन चुनाव चुनाव तो गोठियावत रिथे!!
भगवान राम किथे-पिरथी म कलजुग बियापे हे अंजनीपुत्र!!उंहा के मनखे राजनीति के फयदा लेयबर कुछ भी कर सकत हे।कुरसी के लालच म भाई ह भाई के परान ले डारत हे।अब उंहा मोर भरत असन भाई नी मिलय जेन अपन बडे भाई के अगोरा म राजपद ल लात मार सके!!तियाग तपस्या ह तइहा के गोठ होगे हे उंहा।तें तो जानतेच हस जब जब चुनाव तिरयाथे मोर जनमभूमि म मोर मंदिर बने के गोठ शुरू हो जथे।फेर होवय कुछु नीही।कतको बच्छर होगे हे मोर भगत मन मोला तिरपाल म तोप के मंदिर बने के बाट जोहत हे।चुनाव सिराथे मंदिर के गोठ सिराथे।उंकर ईमान धरम राजनीति हरे पुत्र!!!
हनुमान जी फेर पूछथे-कलजुग कब सिराही परभु!कलजुग के बढत पाप ह मोर से सहन नी हो सकत हे।त्रेता म एकझन रावन रिहिस परभु!फेर कलजुग म चारों खूंट रावन घूमत रिथे।नारी-परानी के अस्मत रात दिन लुटावत हे परभु!!साधु रूप धरके कतको राक्छस मन सिरतोन के संत समाज ल बदनाम करत हे।लालच अऊ घमंड म बूडे मनखे ह अपन आप ल पिरथी के भगवान समझ बैठे हे।रामराज के अगोरा म सब बियाकुल हे स्वामी!
भगवान रामचन्द्र हनुमानजी ल फेर किथे-मनखे ल अपन करनी के फल मिलबे करही हनुमान!!करमदंड के बिधान ले कोनो नी बूचक सकय।जा पुत्र!पिरथी म लहुट जा अउ मोर भगत मन के पीरा ल हरत रा।बहुत जल्दी फेर में ह पिरथी म अंवतरहूं अउ पापी मन के नाश करके रामराज के थापना करहूं।
हनुमानजी भगवान कना ले बिदा लेके हमर गांव के लीम चंवरा म आके बिराजे हे।एक हाथ म गदा अउ दूसर हाथ म पहाड ल उठाय।पहाड ह भगवान से बंधे बचन के हरे जेला हनुमंत लाल ह उठाय हे।फेर एक हाथ म गदा तको हवय जे ह भगवान के अवतार के अगोरा म हे।जेन दिन भगवान अवतरही उही दिन हनुमानजी ह बचन के बोहे पहाड ल भुंइया म मढाही अउ ओकर गदा पापी मन के पीठ म परही।
जय श्री राम!!
“अई!उठ ना जी!!कतक बेरा ले सुते रबे अउ नींद म घलो जय श्री राम काहत हस!तें कते लंका ल लेसबे?”-काहत खिल्लू के दाई माने मोर सिरिमति ह मोला उठा दिस।रातकुन टी बी समाचार देखत रेहेंव त उही म हनुमानजी के जात ऊपर समाचार चलत रिहिसे।इही समाचार ह मोला सपना म बैकुंठ दरसन करा दिस काते?फेर सपना म घलो अउ जागत हंव तभो एके ठ सवाल हे-कब अही रामराज?

रीझे यादव
टेंगनाबासा (छुरा) 493996

संघरा-मिंझरा

Leave a Comment