नारी अउ सम्मान

hema-sharmaनारी हा प्रेम अउ त्‍याग के रूप कहेगे हे, पुरान अउ इतिहास हा एकर गवाही देथे कि नारी के महिमा हा अपरमपार हे। नारी ला भगवान के दरजा घलो दे गे हे फेर अभी के स्थिति हा बदल गे हे।
नारी ला शास्त्र अउ समाज मा अतका सम्मान मिले हे के ओखर बरनन ला दू-चार आखर मा नइ करे जा सकय, नारी ला ऐ मान सममान हा ओखर आचार, व्यवहार ओखर त्याग अउ धीरज के सेति मिले हे।
नारी ला माॅं दुर्गा के रूप कहिथे, माता के नवो रूप हा नारी के विभिन्न रूप के प्रतीक आय। रूप, विदया, शक्ति, ममता, क्षमा ऐ सब गुण हा नारी के चरित्र आधार ऐ अउ ऐही हर नारी ला समाज मा शास्त्र मा अलग महत्‍ता दिलाथे।
शास्त्र मेे वरनन चाहे माता सीता, सावित्रि, अहिल्या कतेक नाम ला गिनाव ऐमन त्‍याग अउ सहनशीलता के मूरत आय। हमर इतिहास मा घलो नारी महिमा के बरनन करे गे हे ओमन के साहस अउ तियाग के अनके कथा अउ उदाहरण हमला पढ़े बर मिलथे चाहे ओ झांसी के रानी लक्ष्मी बाई के अंग्रेज मन सग अपन देश बर लड़ई हो, ओखर त्‍याग अउ बलिदान ला सदा याद रखही। चाहे रानी पद्मिनी के रूप, रंग अउ अपन इजजत ला बचाए खातिर जौहर (अग्नि स्नान) करई हो, उन इतिहास मा अमर होगे।
हमर इतिहास अइसन अनेक उदाहरण ले भरे हे, कतेक के बरनन करव। मगर समस्या तो आज के नारी के आय आधुनिक होत-होत अतेक आधुनिक होगे कि ओखर अस्मिता उपर ही प्रश्न उठे लागित पढ़ लिख के ज्ञान बढ़ाना तो बने बात है फेर अहंकार ह हम ला कहांं ले जाथे। ज्ञान अउ अधिकार के उचित उपयोग हर उन्नति के रास्ता में लेगथे फिर उही ह अगर अहंकार हो जाथे तो विनाश बन जाथे।
आज नारी अपन ज्ञान अउ अधिकार के उपयोग अईसने करथे, आप विज्ञापन मन ला देखव नारी उपभोग के वस्तु बन गे हे। सामान कोई भी होवे फिर ओमा नारी के होना जरूरी हे। अउ वहु मा नारी के अईसन रूप अउ अंग प्रदर्शन देखाथे के, देख के लाज लाग जाथे। फेर कोई ला दोस देना बेकार हे काबर की हम खुद ओखर बर जिम्मेदार हन।
अगर हम अपन मान-सम्‍मान ला ताक मा रख के पईसा अउ नाम बर कोई भी काम ला करबो तो सम्मान तो कम होबेच करही, अइसे नइ ऐ के सबो झन वइसने हे, फिर कहावत हा सहीच हे एक ठन मछरी जम्‍मो तालाब ला गंदा करथे। नारी स्‍वयं नही चाही तो ओखर से कोई गलत काम नहीं करवा सके लेकिन कहू न कहू हमरे ले गलती होवथे, हम खुद नही समझना चाहत हन के आधुनिकता अउ समानता के नाम मा हम का करत हन अउ कहांं जाथन।
अब जरूरत हे हम ला सोचे के अउ संंभले के, नारी केवल मनोरनजन अउ उपभोग के सामान बन के मत रहि जाय। नारी घर के धुरी ऐ अउ समाज परिवार के आधार आय, हम अपन मान सम्मान ला बचाये बर अब मनन करन।

श्रीमती हेमा शर्मा
आचार्या स.शि.मंदिर
कुसमुण्डा (कोरबा)

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